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ओडीएफ पंचायत के शौचालयों की तस्वीर कहती है कुछ और ही कहानी, आप भी देखें…

बिना छत, शेड व दरवाजे के शौचालयों में कपड़े का पर्दा लगाने की मजबूरी, शौचालय के नाम पर सिर्फ खड़ी की गई है दीवार

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Toilet of ODF village

Toilet of ODF village

बड़वार. केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण घर-घर शौचालय योजना का कई जगहों पर पूरी तरह बंटाधार हो गया है। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही तथा जिम्मेदारों द्वारा शौचालय निर्माण में किए गए भ्रष्टाचार की कहानी कई गांवों के शौचालय बयां करते हैं। न कोई देखने वाला और न ही कोई जांच करने वाला। बस रुपए हजम करने की योजना बनकर रह गई है।

हद तो तब हो जाती है जब उक्त ग्राम पंचायत या नगर पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया जाता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही होती है। सूरजपुर जिले के बनारस रोड-रमकोला मार्ग पर स्थित ग्राम पंचायत बोंगा की भी कुछ ऐसी ही कहानी है।

इस पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है लेकिन यहां के 50 प्रतिशत शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं। जो बने हैं, वे भी जर्जर होने की कगार पर हैं।


सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत बोंगा को भले ही सरपंच-सचिव की लापरवाही से कागजों में ओडीएफ घोषित कर दिया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यहां 50 प्रतिशत शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं, जो बने हैं, वे भी जर्जर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। इसकी वजह से ग्रामीण शौचालयों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

वे खुले में शौच करने को मजबूर हैं। बोंगा के हितग्राही देवसाय पंडो, कुंजलाल पंडो, भगमनिया ने बताया कि उनके घर अभी तक शौचालय नहीं बना है। वहीं सरईडांड़ निवासी आलम साय ने बताया कि घर में शौचालय के नाम पर मात्र दीवार ही खड़ी की गई है।

सरपंच-सचिव से कई बार गुहार लगाने के बावजूद कोई पहल नहीं की जा रही है। रजिन्दर पिता बुधन कोड़ाकू, संगीता अगरिया का भी शौचालय नहीं बना है। इन्हें सरपंच-सचिव काफी दिनों से घूमा रहे हैं। इसी तरह अन्य कई ऐसे हितग्राही हैं जिनके शौचालय अधूरे पड़े हैं और वे इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।


पीएम आवास योजना में भी गड़बड़ी
इस पंचायत में पीएम आवास योजना में भी जमकर गड़बड़ी की जा रही है। आवास बनकर तैयार होने से पहले ही जर्जर हो गए हैं। नाराज ग्रामीणों का कहना है कि लापरवाह सरपंच-सचिव पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे प्रतापपुर जनपद का घेराव करने को मजबूर होंगे।