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भाई की कलाई पर कल सजेगा बहन का प्यार

राखी और मिठाइयों की दुकानों पर चहल-पहल बढ़ी
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भाई की कलाई पर कल सजेगा बहन का प्यार

सूरत. भाई-बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन रविवार को शहर में धूमधाम से मनाया जाएगा। शुभ मुहूर्त में बहनें भाइयों को राखी बांध कर उनकी कुशलता की कामना करेंगी। भाई उन्हें उपहार देकर उनकी रक्षा का दायित्व उठाएंगे। शुक्रवार को राखियों और मिठाइयों की दुकानों पर चहल-पहल रही।

वेसू, पीपलोद, सिटीलाइट, भटार, परवत पाटिया, गोडादरा, उधना समेत अन्य इलाकों में युवतियों और महिलाओं ने भाइयों के लिए राखियां तथा मिठाइयां खरीदीं तो युवकों ने बहनों के लिए विभिन्न उपहार खरीदे। रविवार को बहनें पारम्परिक वेषभूषा में भाइयों के घर जाएंगी और शुभ मुहूर्त में भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी।

कई समाजिक संगठनों से जुड़ी महिलाएं सरकारी कार्यालयों, अनाथालयों में लोगों को राखी बांधेंगी। ब्राह्मण अपने यजमानों के घरों और प्रतिष्ठानों पर जाकर उन्हें रक्षा सूत्र बांधेगे तथा उनके मंगल की कामना करेंगे।

दिनभर श्रेष्ठ समय
पंडित घनश्याम भारद्वाज ने बताया कि सावन माह की पूर्णिमा तिथि शनिवार शाम ३ बजकर १६ मिनट से शुरू हो जाएगी, जो रविवार शाम ५ बजकर २५ मिनट तक रहेगी। राखी बांधने के लिए रविवार सुबह ५ बजकर ५९ मिनट से शाम ५ बजकर २५ मिनट तक का समय श्रेष्ठ है।

विद्यार्थियों ने सेना के जवानों को राखी बांधी


सूरत. रक्षाबंधन के उपलक्ष में शुक्रवार को एस.वी.पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने 5वीं गुजरात एनसीसी बटालियन के कर्नल एस.फ्रांसिस के सानिध्य में सेना के जवानों को रक्षा सूत्र बांधकर देश एवं देशवासियों की सुरक्षा का वचन लिया।

स्कूल के ताराचंद ढाका ने बताया कि विद्यार्थियों में देश प्रेम की भावना जागृत करने और वीर सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया। गौरतलब है कि एस.वी. पब्लिक स्कूल की अगुवाई में सीमा पर तैनात सैनिकों को सूरत से ११ हजार राखियां भेजी गई हैं।

आध्यात्मिक राखी


सूरत. उधना महिला मंडल द्वारा शुक्रवार को शासन साध्वीश्री ललित प्रभा के सानिध्य में आध्यात्मिक राखी का आयोजन किया गया। साध्वी ने त्याग के महत्व को समझाते हुए विभिन्न राखियों की समय मर्यादा बताई। हीरे की राखी यानी एक वर्ष का त्याग, सोने की राखी यानी छह माह का त्याग, चांदी की राखी यानी चार माह का त्याग, धागे की राखी यानी एक माह का त्याग। इस मौके पर महिलाओं ने विभिन्न आसक्तियों का त्याग करते हुए श्रद्धानुसार राखियां बंधवाईं।