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नियमों की जटिलता ने अटकाईं सडक़ दुर्घटना सहायता योजना की फाइलें

न्यू सिविल अस्पताल भेजी गईं 145 फाइलों में से 60 पर ही हुआ काम

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नियमों की जटिलता ने अटकाईं सडक़ दुर्घटना सहायता योजना की फाइलें

सूरत.

न्यू सिविल अस्पताल में दुर्घटना सहायता योजना के तहत निजी अस्पतालों से आई 145 से अधिक फाइलों का निपटारा नहीं होने की जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार के नोटिफिकेशन में कई नियमों में पेचेदगियां हैं, जिससे अस्पताल तथा जांचकर्ता अधिकारी को परेशानी आ रही है। कलक्टर ने एसएमसी तथा जिला पंचायत को योजना के प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार ने सडक़ दुर्घटना में घायल लोगों को किसी भी नजदीकी अस्पताल में 48 घंटे तक उपचार देने की व्यवस्था की है। इसके लिए ५० हजार रुपए तक का खर्च सरकार की ओर से चुकाया जाता है। हाल ही एक संगठन ने कलक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा था, जिसमें निजी अस्पतालों द्वारा चार्ज वसूलने की बात कही गई थी। राज्य सरकार की व्यवस्था का लाभ आम जनता को नहीं मिल रहा है। दूसरी तरफ निजी अस्पतालों की ओर से सड़क़ दुर्घटना सहायता योजना के तहत क्लेम पास करने के लिए करीब 145 फाइलें न्यू सिविल अस्पताल भेजी गई हैं। सूत्रों ने बताया कि इनमें से ६० फाइलों की ही जांच हो पाई है।

चिकित्सकों ने बताया कि इस योजना को लागू हुए कुछ दिन ही हुए हैं। इलाज के लिए एक निश्चित राशि सरकार की ओर से तय की गई है। हड्डी टूटने, सिर पर गंभीर चोट, आइसीयू वार्ड खर्च आदि की कैटेगरी वाइज अलग-अलग राशि तय है। उपचार की फाइल में एक्स-रे प्लेट, एमएलसी रजिस्टर की फोटो समेत कई डॉक्यूमेंट की अनिवार्यता है। चिकित्सकों को क्लेम की ज्यादातर फाइलों में कमियां मिल रही हैं।

इसके निपटारे के लिए पिछली संकलन बैठक में सूरत कलक्टर धवल पटेल से चर्चा की गई थी। उन्होंने न्यू सिविल अस्पताल को सिर्फ फाइलों की जांच तथा क्लेम पास करने की जवाबदारी निभाने के निर्देश दिए। इस योजना को लागू करने में आ रही दिक्कतों को लेकर सूरत महानगर पालिका को शहरी विस्तार में तथा जिला स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस योजना को लागू करने के बाद इसे क्रियान्वित करने के लिए अब तक कोई बैठक नहीं हुई है।