
Prakash Raj And Pawan Kalyan(this photo from x)
Prakash Raj slams Naga Banu Konidela statement: आंध्र प्रदेश के डिप्टी चीफ मिनिस्टर और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण इन दिनों एक बड़े राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। इसकी वजह ये है कि उनके करीबी और पार्टी नेता नागा बाबू कोनिडेला ने सोशल मीडिया पर एक विवादित बयान दिया, जिस पर फेमस एक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने कड़ी आपत्ति जताई।
पवन कल्याण को हाल ही में तेलंगाना में सार्वजनिक बैठक आयोजित करने की अनुमति नहीं मिली। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि तेलंगाना किसी की 'अय्या जागीर' यानी बाप की संपत्ति नहीं है। इस बयान के बाद उन्हें राजनीतिक गलियारों से तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा। इसी बीच, पवन कल्याण के समर्थक और नागा बाबू कोनिडेला ने X पर पवन की एक फोटो शेयर की, जिस पर लिखा था 'पवन कल्याण - द पीपल्स लीडर'। इस पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने लिखा, "एक नेता की बात ही आखिरी होती है। उसके रास्ते में कितने शैतान और राक्षस देखे, ये केवल वही जानता है। इसलिए अपने संदेह बंद करो, अपनी जबान बंद करो और बिना सवाल किए अपने नेता का अनुसरण करो।"
इतना ही नहीं, नागा बाबू के इस बयान पर एक्टर प्रकाश राज ने तुरंत पलटवार किया। उन्होंने उस पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए तेलुगु में लिखा, "हम भेड़ नहीं हैं जो गुजारे के लिए गुलामी करें। ये धमकियां बंद करो, नागा बाबू। सवाल करना हमारा अधिकार है। कोई भी नेता चाहे वो खुद को कितना भी बड़ा नेता समझे जवाब देने के लिए बाध्य है। समझे?" बता दें, प्रकाश राज का ये जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और हजारों लोगों ने इसे लाइक और शेयर किया।
इसमें सबसे खास बात ये है कि इस सीधे टकराव से एक दिन पहले भी प्रकाश राज ने पवन कल्याण का नाम लिए बिना एक व्यंग्य के तौर पर पोस्ट की थी। तेलुगु में लिखी उस पोस्ट का मतलब था, "अगर तुम कहो कि आ रहे हो, तो क्या हम मना कर देंगे? जरूर आओ, जनाब लेकिन आने से पहले ये तो बताओ, क्या अकेले आ रहे हो? किसी गठबंधन के साथ? या फिर किसी केंद्रीय पार्टी के सहारे? #justasking"। ये तंज सीधे पवन कल्याण पर था, जिसमें प्रकाश राज ये जानना चाह रहे थे कि वे आगामी चुनावों में स्वतंत्र रूप से उतरेंगे या किसी राष्ट्रीय पार्टी के साथ गठबंधन करेंगे।
ये विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब प्रकाश राज ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच अधिक क्षेत्रीय एकता की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक सीमाएं दोनों राज्यों के लोगों के बीच की भावनात्मक डोर को कभी नहीं तोड़ सकतीं। तो वहीं पवन कल्याण ने भी हैदराबाद में अपनी सभाओं और उसके बाद दर्ज पुलिस शिकायतों का हवाला देते हुए सवाल उठाया था कि राज्य की सीमाओं पर नेताओं को रोकने के पीछे की मंशा क्या है। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच गहरे व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए इस तरह की राजनीतिक रोकटोक को अनुचित बताया। फिलहाल ये विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा।
Published on:
06 Jun 2026 06:15 pm
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