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बीसलपुर बांध में पानी के नीचे छह मीटर तक मिट्टी व बजरी की परत, बांध निर्माण के बाद पहली बार हुआ सर्वे

Bisalpur dam: बीसलपुर बांध में पहली बार की जलभराव क्षमता बढ़ाने के साथ ही पानी की आवक वाली Banas, खारी व डाई नदियों में बांध बनने के बाद से एकत्र Gravel व मिट्टी की मात्रा जांचने का सर्वे कार्य पूरा हो गया है। यह Mumbai की निजी कम्पनी से दो माह पूर्व State government की ओर से शुरू करवाया गया।

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बीसलपुर बांध में पानी के नीचे छह मीटर तक मिट्टी व बजरी की परत, बांध निर्माण के बाद पहली बार हुआ सर्वे

टोंक. राजमहल. बीसलपुर बांध (Bisalpur dam) में पहली बार की जलभराव (Water logging) क्षमता बढ़ाने के साथ ही पानी की आवक वाली बनास (Banas), खारी व डाई नदियों में बांध बनने के बाद से एकत्र बजरी व मिट्टी की मात्रा जांचने का सर्वे (Survey to check the soil) कार्य पूरा हो गया है।

यह मुम्बई की निजी कम्पनी से दो माह पूर्व राज्य सरकार की ओर से शुरू करवाया गया। सर्वे रिपोर्ट दस दिन में ड्रेजिंग कॉरर्पोरेशन ऑफ इण्डिया विशाखापट्नम Dredging Corporation of India Visakhapatnam को सौंपेगी।

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ड्रेजिंग कॉर्पोशन ऑफ इण्डिया विशाखापट्नम यह रिपोर्ट राजस्थान स्टेट माइन्स एण्ड मिनरल्स (Rajasthan State Mines and Minerals) के सुपुर्द करेगी। उसके बाद राज्य सरकार व माइन्स विभाग (Department of mines) तय करेगा की बांध के जलभराव व सूखे क्षेत्र से मिट्टी व बजरी निकालने का कार्य करवाना है या नहीं।


सर्वे कार्य दो चरणों में पूरा हुआ है। प्रथम चरण के दौरान सर्वे कम्पनी ने बांध के जलभराव के सूखे पड़े क्षेत्र का सर्वे किया है। वहीं दूसरे चरण में जल से भरे व कीचड़ युक्त क्षेत्र में स्थित बजरी व मिनरल्स आदि का सर्वे किया गया है।

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सर्वे कम्पनी के डायरेक्टर केके सिंह ने पत्रिका (patrika) को बताया कि बांध के जलभराव व सूखे क्षेत्र में लगभग एक मीटर गहराई तक मिट्टी आदि जमा है। उसके बाद लगभग पांच से छह मीटर की गहराई तक बजरी एकत्र मानी जा रही है।

इसका सम्पूर्ण डाटा तैयार कर अगले दस दिवस के अंदर ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन विशाखापट्नम को सौंप दिया जाएगा। उसके बाद ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया विशाखापट्नम की ओर से रिपोर्ट राजस्थान स्टेट माइन्स एण्ड मिनरल्स को सौंपेगी।

इसके बाद बांध से मिट्टी व बजरी के निकाले या नहीं निकाले जाने के बारे में राज्य सरकार तय करेगी।
उल्लेखनीय है कि सर्वे का कार्य राज्य सरकार ने राजस्थान स्टेट माइन्स एण्ड मिनरल्स को एक वर्ष पूर्व सौंपा था।

राजस्थान स्टेट माइन्स एण्ड मिनरल्स ने उक्त कार्य के लिए ड्रेजिंग कॉरर्पोशन ऑफ इण्डिया विशाखापटनम के सुपुर्द किया था। विशाखापट्नम की ओर से सर्वे कार्य मुम्बई की निजी कम्पनी से करवाया है है।

सर्वे को लेकर कम्पनी के लगभग आधा दर्जन कार्मिकों व इंजीनियरों के साथ गत 20 अप्रेल को खारी नदी से सर्वे कार्य की शुरुआत की थी, जिसमें लगभग 21 लाख रुपए की लागत आई है।


यहां पर हुआ सर्वे
बांध के जलभराव में सर्वे करने वाली कम्पनी के डायरेक्टर केके सिंह ने बताया कि उक्त सर्वे बांध के जलभराव क्षेत्र की बनास, खारी व डाई नदियों का किया गया गया है, जिसमें बनास नदी के कुल 25 किलामीटर क्षेत्र का सर्वे हुआ है।

इसमें 7 किलोमीटर तक सूखे क्षेत्र का व 18 किलामीटर जलभराव के बीच सर्वे किया गया है। इसी प्रकार डाई नदी का कुल सर्वे 15 किलोमीटर का हुआ है, जिसमें 6 किलामीटर सूखा क्षेत्र है, वहीं 5 किलामीटर जलभराव के बीच व 4 किलोमीटर दलदली कीचड़ युक्त भूमि शामिल है। इधर, खारी नदी के 5 किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे हुआ है, जिसमें सम्पूर्ण नदी क्षेत्र सूखा था।

हाल ही में हुए सर्वे में सामने आया है कि लगभग 15 वर्षो में पानी के नीचे एक मीटर की गहराई तक दलदली मिट्टी एकत्र हुई है। वहीं उसके नीचे बांध बनने से पूर्व की लगभग पांच से छह मीटर की गहराई तक बजरी एकत्र मानी जा रही है।

परियोजना के अनुसार बांध बनने से पूर्व बनास के बहते जलस्तर से मिट्टी की मात्रा कम एकत्र होती थी। वही बांध बनने के बाद बांध से पानी के ठहराव के चलते बारिश में बहकर आने वाली मिट्टी कचरा आदि संग्रहण होने से लगभग एक मीटर की गहराई तक मिट्टी एकत्र हुई है।

यह मिट्टी तीनों नदियों के क्षेत्र में एकत्र है। कई जगहों पर जलभराव खाली होने के बाद होते बजरी के अवैध दोहन से काफी कम मात्रा में मिट्टी व बजरी बची हुई है।

बीसलपुर बांध फैक्ट फाइल-
बीसलपुर बांध का निर्माण 1996 में
बांध की भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर
कुल जलभराव में बांध में 38 .70 टीएमसी पानी का होता है भराव
पहली बार पूर्ण जलभराव हुआ 2004 में
बांध बनने के बाद अब तक 2004, 2006 , 2014 व 2016 में हुआ पूर्ण जलभराव
पूर्ण जलभराव में जमीन स्तर से 20 मीटर ऊंचाई तक पानी भरता है।
बांध बनने के बाद पहली बार सूखा 2010 में
2010 में बांध सूखने के दौरान बांध का गेज 298 .6 7 आर एल मीटर का था गेज। जिसमें 0.48 एमसीएफटी पानी रह गया था शेष, अभी बांध में लगभग जमीन स्तर से चार से पांच मीटर पानी शेष बचा हुआ है।