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बीसलपुर के पानी में डूबी बनास की गहलोद रपट , टोंक आने-जाने के लिए लगाना पड़ रहा 50 किमी का चक्कर

Gehlad Rapat immersed in water: बीसलपुर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद से बनास नदी में गहलोद रपट पानी का स्तर बढ़ गया हैं।  

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बीसलपुर के पानी में डूबी बनास की गहलोद रपट , टोंक आने-जाने के लिए लगाना पड़ रहा 50 किमी का चक्कर

बीसलपुर के पानी में डूबी बनास की गहलोद रपट , टोंक आने-जाने के लिए लगाना पड़ रहा 50 किमी का चक्कर

पीपलू. बनास नदी Banas में बीसलपुर बांध Bisalpur Dam से पानी छोड़े जाने के बाद से गहलोद रपटGahlod Rapat पूरी तरह से पानी में डूब गई है, जिससे क्षेत्र के दर्जनों गांवों का संपर्क पिछले 8 दिनों से टोंक जिला मुख्यालय से टूटा हुआ है। लोगों को करीब पचास किलोमीटर से अधिक का चक्कर लगा कर टोंक जाना पड़ रहा है।

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बीसलपुर बांध से पूर्ण भराव क्षमता 315.50 आर.एल. मीटर से अधिक ओवर फ्लो पानी बनास नदी में छोड़ा जा रहा है। सोमवार को 3 गेट खोलकर निकासी के बाद गहलोद रपट पर पानी का स्तर बढ़ गया हैं। सुरक्षा की दृष्टि से इस बनास नदी गहलोद में बैरिकेड््स लगा कर हैड कांस्टेबल राम किशन जाट निगरानी कर रहे हैं।

बनास नदी गहलोद में पानी आने से क्षेत्र के कुरेड़ा, देवरी, गहलोद, नानेर, जवाली सहित टोड़ारायसिंह व मालपुरा उपखण्ड के कई दर्जनों गांवों के लोगों का गहलोद मार्ग से टोंक मुख्यालय का सीधा संपर्क टूट गया है। वही अब टोंक आने-जाने के लिए लोगों को 50 कि.मी. का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा हैं।

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इस रास्ते से गहलोद, मारखेड़ा, इस्लामपुरा, पासरोटिया, बिशनपुरा, मालीपुरा समेंत दर्जनों गांवों के करीब एक हजार से अधिक विद्यार्थियों रोजाना टोंक पढऩे के लिए जाते है। इतना ही नहीं इस गहलोद रपटे से रोजाना सैकड़ों किसान अपनी फसल को टोंक कृषि मण्डी में बेचने व अपनी रोजमर्रा की चीजों की खरीदारी के लिए टोंक जाते हैं।

वहीं गंभीर घायल, बीमार एवं प्रसूताओं को भी टोंक सआदत अस्पताल में इसी गहलोद रपटे से लाया जाता है। लेकिन अब इस रपटा के पानी में डूब जाने से लोगों को सोहेला होकर लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा हैं।

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