ग्वालियर रोड स्थित सैंया में इटौरा वाली माता के मंदिर की स्थापना के बारे में कोई प्रमाणिक आधार नहीं है, लेकिन मंदिर सैकड़ों साल पुराना माना जाता है। मान्यता है कि एक बार यहां के राज कणिंगा को देवी ने स्वप्न में दर्शन दिए और केला के पेड़ के नीचे प्रकट हुईं। तभी से केला के पेड़ के पास ही देवी मंदिर बना दिया गया और इन्हें कैला देवी ही कहा जाने लगा। लाखों की संख्या में हर साल आने वाले भक्त विभिन्न प्रकार की मनौती लेकर देवी दरबार में पहुंचते हैं। माता रानी उनको निराश नहीं करती। सभी की मनोकामना पूरी करने वाली माता के दरबार में नवरात्रा में भक्तों की भीड़ रहती है। यहां सरकारी बस के अलावा निजी वाहनों से भी आ सकते हैं।
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