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चम्पाबाग: विवादों में गुजर गए 40 साल, विवि का नाम तक बदल गया, लेकिन नहीं बदले हालात

- - सुखाडिय़ा विवि की ओर से जमीन पर हक के लिए उठने लगी आवाज - खूब दौड़े-कागजी घोड़े
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उदयपुर

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bhuvanesh pandya

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Updated: 28 Aug 2021, 1:38 PM IST

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- मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय - आईक्यूएसी की बैठक में नहीं हो पाया पदोन्नति पर निर्णय

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. चम्पाबाग में विश्वविद्यालय के स्वामित्व वाली 14.59 हेक्टेयर बेशकीमती जमीन का विवाद 40 साल पुराना है। चार दशक बीतने के बाद भी अब तक इस पर निर्णय नहीं हो पाया है। खास बात ये है कि तब विश्वविद्यालय का नाम भी उदयपुर विवि था, लेकिन अब इतने वर्षों बाद विवि का नाम तो बदल गया लेकिन हालात नहीं बदले। हाल में विवि के कुलपति प्रो अमेरिका सिंह ने इस पर अपनी आवाज तेज की है, सबसे पहले चम्पाबाग को लेकर इस भूमि को विवि के लिए आरक्षित रखने की मांग पर तत्कालीन कुलपति राजनाथ सिंह ने जिला कलक्टर को 20 नवम्बर 1980 को पत्र भेजा था। इसके बाद से लगातार कई पत्र व्यवहार तो हुए लेकिन इस पर विवाद ही बढ़े आगे कुछ काम नहीं हो पाया।

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ऐसे होते रहे पत्र व्यवहार

- चम्पाबाग भूमि विवि के विकास के लिए दिलाने के संबंध में तत्कालीन कुलपति ने शिक्षा मंत्री को 25 अक्टूबर 1980 को पत्र भेजा था।

- शिक्षा सचिव राज्य सरकार की ओर से चम्पाबाग भूमि विवि के विकास के लिए अवाप्त करने को लेकर धारा 4 के नोटिफिकेशन जारी करने भूमि के संबंध में जिला कलक्टर से 12 मार्च 1981 को रिपोर्ट मांगी थी। - भूमि विवि के लिए अवाप्त करने सम्बन्धी वांछित सूचना तहसीलदार गिवा्र की ओर से उप जिला कलक्टर को 3 अक्टूबर 1981 को प्रस्तुत की गई।

- चम्पाबाग व निरंजनी अखाड़ा भूमि विवि के विकास के लिए अवाप्ति की अधिसूचना 3 अक्टूबर 1981 को जारी की गई।

- 30 अक्टूबर 81 को अधिसूचना का प्रकाशन राजस्थान राज पत्र में हुआ।

- राज्य सरकार की ओर से भूमि अवाप्ति के लिए 16 सितम्बर 1994 को अधिसूचना जारी की गई।

- 17 जुलाई 1995 को तहसीलदार गिर्वा को विवि द्वारा भूमि के मुआवजा निर्धारण के लिए लिखा गया। इस पर तहसीलदार गिर्वा ने 11 अगस्त 95 को याचिकाओ के निर्णय होने तक मुआवजा निर्धारण की कार्रवाई किया जाना संभव नहीं है, साथ ही 20 लाख रुपए राशि सुरक्षित है। - कुल सचिव द्वारा सचिव नगर विकास प्रन्यास को अवाप्ति अधीन भूमि का रूपान्तरण नहीं करने के लिए 30 अप्रेल 1997, 14 मई 1997, 1 जुलाई 1997, 11 जनवरी 2000, व विवि अभियन्ता द्वारा 11 जुलाई 1997, 16 सितम्बर 2000 व 23 अगस्त 2004 को पत्र लिखे गए थे। (यह केवल बानगी भर है, ऐसे कई पत्र व्यवहार विवि व प्रशासन के बीच होते रहे हैं। इसके बाद भी अब तक इसका कोई परिणाम सामने नहीं आया है।)

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एनएसयूआई ने दिया एडीएम को ज्ञापन एनएसयूआई ने एडीएम सिटी अशोक शर्मा को ज्ञापन देकर मांग की है कि चम्पाबाग भूमि पर अवैध निर्माण रोका जाए। उसके दस्तावेज सार्वजनिक हो, इस दौरान प्रदेश महासचिव कुशलेश चौधरी, विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष चिराग चौधरी, पूर्व सुविवि अध्यक्ष अमित पालीवाल, प्रदेश चेयरमैन शक्ति सिंह झाला, प्रदेश संयोजक मोहित चौधरी सहित कई छात्र नेता मौजूद थे।

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सुटा ने दी आन्दोलन की चेतावनी चंपाबाग में चल रहे अवैध निर्माण को लेकर सूटा ने चेतावनी दी है। सुटा (सुखाडिय़ा यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन) अध्यक्ष देवेन्द्रसिंह राठौड़ ने बताया कि नगर निगम को पत्र लिखकर तत्काल अवैध निर्माण कार्य रोकने के लिए चेतावनी दी है। निगम यदि इसे नहीं रोकता है तो सुटा आन्दोलन करेगा। राठौड़ ने बताया कि चंपाबाग स्वामित्व की लड़ाई में कुलपति प्रो सिंह के साथ विवि शिक्षक इस लड़ाई में कूद पड़े हैं। इसे लेकर सुटा अब अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करेगा।