आरटीआई से अगर आप जानकारी चाहेंगेे तो इसका शुल्‍क उड़़ा़ देगा आपके होश.. यकीन ना हो तो पढि़ए खबर..

राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने 50 पेज के जीएसटी सहित मांगे 30,680 रुपए , अधिनियम में प्रति पेज शुल्क 2 रुपए तय

By: madhulika singh

Published: 14 Nov 2017, 02:35 PM IST

मुकेश हिंगड़/ उदयपुर . राजस्थान हाउसिंग बोर्ड में सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत आवेदन पर शुल्क जमा करने संबंधित पत्र देखकर आवेदक हैरत में पड़ गया। बोर्ड ने 52 पेज वाली सूचना के लिए जीएसटी जोड़ते हुए कुल 30,680 रुपए जमा कराने को कहा।


आवेदक ने बोर्ड से विकसित कॉलोनी की टाइप डिजाइनें मांगी थी। उल्लेखनीय है कि आवेदन में सात प्रकार की सूचनाएं मांगी लेकिन बोर्ड एक ही बिन्दु पर जानकारी जारी कर रहा है। हाउसिंग बोर्ड में उदयपुर के न्यू भूपालपुरा निवासी नरेन्द्र कुमार भेरविया ने आवेदन कर राजस्थान आवासन मंडल उदयपुर कार्यालय के अधीन विकसित व प्रस्तावित कॉलोनियों के विभिन्न क्षेत्रफल के मकानों की टाइप डिजाइन की प्रतिलिपि मांगी थी। जवाब में उप आवासन आयुक्त ने 12 अक्टूबर 2017 को आवेदक को पत्र के जरिए कहा कि शहर की विभिन्न कॉलोनियों में मकानों की टाइप डिजाइन की कुल संख्या 52 है। इन पुरानी डिजाइन के कम्प्यूटराइज्ड प्लान उपलब्ध करवाए जा सकेंगे जिसके लिए निर्धारित शुल्क जमा कराएं। उन्होंने बताया कि इसके लिए प्रति टाइप डिजाइन 500 रुपए और 18 प्रतिशत जीएसटी के साथ 590 रुपए जमा करवाने होंगे। इस प्रकार कुल 52 डिजाइन के लिए 30,680 रुपए जमा कराए ताकि टाइप डिजाइन उपलब्ध कराई जा सके।

 

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कानून में प्रति पेज दो रुपए राशि
आवेदक का कहना है हाउसिंग बोर्ड ने नगर निगम को जो फाइलें हस्तांतरित की है उसमें टाइप डिजाइन नहीं है। ऐसे में डिजाइन तो हाउसिंग बोर्ड के पास ही है और उसकी प्रति लेने के लिए दो रुपए का शुल्क ही लगेगा लेकिन बोर्ड प्रति पेज 590 रुपए मांग रहा है। सूचना का अधिकार कानून में मुद्रित रूप से दी गई सूचना के लिए ए-4 व ए-3 का शुल्क दो रुपए प्रति कॉपी एवं सीडी-फ्लॉपी का शुल्क 50 रुपए तय है।

तय राशि तो देनी होगी

हम नगर निगम को कॉलोनी हस्तांतरित करने के साथ ही टाइप डिजाइन भी फाइलों में भेज देते है। कोई डिजाइन के लिए आवेदन करता है तो सरकार ने आदेश में जो दर तय कर रखी है, उसके अनुसार राशि जमा कर दी जाती है। सूचना के अधिकार में दो रुपए प्रति है लेकिन उसमें टाइप डिजाइन कैसे दे सकते हैं। इसके लिए तो जो राशि तय कर रखी है वह तो जमा करवानी होगी।
- आर.सी. जैन, उप आवासन आयुक्त, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, उदयपुर

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