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उदयपुर में अब अतिक्रमण की शिकायत करनी है तो देना होगा आईडी प्रूफ, शिकायत करने वाले की पहचान रखी जाएगी गोपनीय

उदयपुर . अब अतिक्रमण की शिकायत करने वालों को अब शिकायत के साथ उनका आईडी प्रूफ देना होगा।
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id proof is compulsory in Encroachment complaint udaipur

उदयपुर . अतिक्रमण की शिकायतों की बढ़ती भरमार में शिकायतें में से कई ऐसी होती है जिसमें मौके पर कुछ मिलता नहीं और नगर निगम का स्टाफ परेशान होना पड़ता है और उनका समय बर्बाद होता है। इसी सोच से अब अतिक्रमण की शिकायत करने वालों को अब शिकायत के साथ उनका आईडी प्रूफ देना होगा।


यह निर्णय गुरुवार को नगर निगम की अतिक्रमण निरोधक समिति की बैठक में किया गया। समिति अध्यक्ष देवेन्द्र जावलिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि शिकायतकर्ता को आईडी प्रूफ के साथ उसका मोबाइल नंबर भी अंकित करवाना होगा। यह जानकारी गोपनीय रखी जाएगी लेकिन इस औपचारिकता पूरी होने के बाद ही कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


जावलिया के अनुसार कई शिकायतें मतभेद व दुर्भावना से कर दी जाती है और मौके पर टीम को परेशान होना पड़ता है। ऐसे में यह प्रक्रिया रखी गई है। बैठक में सदस्य नरेंद्र टांक, शोभा मेहता, राजस्व अधिकारी संदीप दाधीच, सहायक राजस्व निरीक्षक मोहित अग्निहोत्री, विजय जैन, राहुल मीणा आदि उपस्थित थे।


स्वीकृति तो संबंधी समिति ही भुगते
समिति ने यह भी निर्णय किया कि भवन अनुमति शाखा से जारी स्वीकृतियां से किसी भी प्रकार के विचलन की शिकायत है तो उसकी कार्रवाई अब वह सेक्शन ही करेगा। इसी प्रकार किसी ने भवन अनुमति के लिए आवेदन कर रखा है और उसे तय अवधि में स्वीकृति नहीं दी जाती है और उसने निर्माण शुरू कर दिया और उसकी शिकायत पर भी कार्रवाई उसी सेक्शन से की जाएगी।


शिकायतकर्ता का घर भी देखेंगे
समिति ने यह भी निर्णय किया कि निगम की पिछली बोर्ड बैठक में किए गए निर्णय के तहत अब पड़ोसियों की शिकायत के मामले में शिकायत करने वाले के घर का भी मौका पर्चा बनाया जाएगा। अगर जांच में उसके वहां भी नियम विपरीत निर्माण या अतिक्रमण होगा तो उसकी भी कार्रवाई की जाएगी।


बेसमेंट से हटाएंगे दुकानें
समिति ने निर्णय किया कि जिन व्यावसायिक कॉम्पलेक्सों के स्वीकृति पत्र में बेसमेंट में पार्किंग दिखा रखी है, उनका सर्वे होगा। ऐसे बेसमेंट में दुकानें या किसी भी प्रकार की गतिविधियां संचालित मिलेगी तो निगम कार्रवाई करेगा।


निगम था तब 12 थे, अब तीन
बैठक में चर्चा की गई कि जब नगर परिषद का दर्जा था, तब यहां 12 राजस्व निरीक्षक थे और अब निगम बनने के बाद मात्र तीन सहायक राजस्व निरीक्षक ही है। उस समय पटवारी भी हुआ करते थे। समिति ने निदेशालय को रिक्त पदों को भरने के लिए पत्र लिखने का निर्णय किया।

हजार वर्ग फीट तक के मामले अध्यक्ष देखेंगे
समिति ने यह भी तय किया कि एक हजार वर्ग फीट से कम के भूखंड व मकान पर अतिक्रमण की शिकायतों के मामलों पर कार्रवाई का निर्णय समिति अध्यक्ष करेंगे। ऐसे मामलों की शिकायत पर सीधे कार्रवाई नहीं की जाएगी और मौका देखकर निर्णय किया जाएगा।