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सीएम घोषणा भूले, उदयपुर की इस सडक़ पर बेकाम खर्चे 70 लाख रुपए, नाबार्ड से मिले बजट का किया दुरुपयोग

सडक़ निर्माण के नाम पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में सरकारी धन (राजस्व) की बर्बादी हो रही है।
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डॉ सुशील सिंह चौहान /उदयपुर . सडक़ निर्माण के नाम पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में सरकारी धन (राजस्व) की बर्बादी हो रही है। गोगुंदा-आेगना मार्ग पर नाबार्ड वित्त पोषित योजना में सितम्बर २०१७ में खर्चे गए ७० लाख रुपए इसी का नतीजा है। विभाग ने ५ किलोमीटर के उस टुकड़े पर पेवर (डामर) करवाने की कार्ययोजना बनाई, जिसके विस्तारीकरण के लिए १४ जून २०१६ को मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने घोषणा की थी।

गोगुंदा में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में करीब दो साल पहले सीएम ने ३५ किलोमीटर लंबी गोगुंदा-आेगना सडक़ के विस्तारीकरण कार्य को मंजूरी दी थी। स्वीकृति मिलने की सूचना को भूलाकर विभागीय ओहदेदारों ने नाबार्ड वित्त पोषित राशि को कस्बे में आमजन को लाभान्वित करने के नाम पर लाखों खर्च कर दिए। अब नाबार्ड के बजट से तैयार सडक़ को मिली स्वीकृति के बाद जेसीबी से खोदने का क्रम जारी है। हैरत इस बात की है कि नाबार्ड बजट से बनी पेवर सडक़ की गारंटी अवधि १५ सितम्बर २०२० है। नई सडक़ के बाद इस गारंटी के लिए संवेदक किसी हद तक जिम्मेदार नहीं होगा।

यह रही खामियां
पीडब्ल्यूडी की ओर से लगाए गए सूचना पट्ट पर जिम्मेदारी अधिकारियों के नाम का कॉलम खाली रखा गया। अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी उस पर अंकित नहीं किए गए। सीएम की घोषणा के बाद भी गारंटी अवधि वाली सडक़ की निविदा लागत कम करने की जहमत नहीं उठाई गई।

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सूचना दी या किया गुमराह!
आरटीआई में मिली सूचना के अनुसार विभाग ने बताया कि गोगुंदा-झाड़ोल उपखण्ड को जोडऩे वाली सडक़ के मुख्य भाग ०/० से ५/० किलोमीटर नॉन पेचेबल होने से नाबार्ड से राशि स्वीकृत हुई। गोगुंदा -ओगना सडक़ पर ओएफसी लाइन डालने से खराब हुई थी। सडक़ के १९ किलोमीटर टुकड़े की चौड़ाईकरण (५.५ मीटर) को वर्ष २०१७-१८ में १९ जून २०१७ को मंजूरी मिली। आवागमन सुचारू रखने के लिए कार्य किया। इसमें सरकार को नुकसान नहीं हुआ है। तख्मीने में डब्ल्यूएमएम की मोटाई १०० एमएम, पीएमसी की मोटाई २० एमएम, ३ मीटर चौड़ाई एवं ५ किलोमीटर लंबाई थी। वर्तमान में सडक़ संतोषप्रद है। अधिशासी अभियंता के बाद गुण नियंत्रण खण्ड ने भी इसकी जांच कर ली है।

सच कुछ, दिखाया कुछ
- सडक़ का नाम: गोगुंदा-ओगना
- योजना का नाम: नाबार्ड से वित्त पोषित (आरआईडीएफ एक्स एक्स २)
- खर्च की गई राशि: ७० लाख
- पेवर प्रारंभ तिथि: १६ मार्च २०१७
- कार्य पूरा होने की तिथि: १५ सितम्बर २०२०
- रखरखाव अवधि: १६ मार्च २०१७ से १५ सितम्बर २०२० (तीन वर्ष)
- संवेदक एजेंसी का नाम: श्रीराम एंड कंपनी, बीकानेर
- निर्माण एजेंसी: पीडब्ल्यूडी जिला खण्ड-२
- जिम्मेदार अधिकारी: अधिशासी अभियंता सीआर प्रेमी/ सहायक अभियंता एनएस डामोर (सूचना पट्ट पर नाम नहीं)