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सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में बढ़ गए वोटर…पीएचडी, एमफिल स्टूडेंट को मिला वोट देने का हक

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सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में बढ़ गए वोटर...पीएचडी, एमफिल स्टूडेंट को मिला वोट देने का हक

भुुुुवनेश पंड्या/ उदयपुर . सरकार ने इस बार छात्रसंघ चुनाव में पीएचडी और एमफिल स्टूडेंट को भी वोट देने का हक दे दिया है जिससे सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में मतदाता विद्यार्थियों की बढ़ोतरी हो गई है। पीएचडी और एमफिल स्टूडेंट को मतदान के लिए एक शपथ-पत्र देना होगा कि वे पूर्ण या अंश कालिक कर्मचारी नहीं है।छात्र कल्याण अधिष्ठाता बीएल वर्मा ने बताया कि इस बार गत वर्ष के मुकाबले वोटर ज्यादा है। गत वर्ष सुविवि में 11564 वोटर थे, इस बार यह आंकड़ा बढकऱ 12,250 हो गया है। चुनाव की तारीख घोषित होने के साथ ही छात्र कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय चुनाव प्रक्रिया निपटाने के कामों में जुट गया है।उल्लेखनीय है कि गत वर्ष छात्रसंघ चुनाव में पीएचडी और एमफिल स्टूडेंट केन्द्रीय छात्रसंघ के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों के चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं था। ये केवल शोध प्रतिनिधि का ही चुनाव कर पाए थे।

मतदाता सूची जारी, मांगी आपत्तियां

वर्मा ने बताया कि गुरुवार को सुविवि के संघटक कॉमर्स,आट्र्स, साइंस और लॉ कॉलेज में मतदाता सूची का प्रकाशन करते हुए शुक्रवार तक आपत्तियां मांगी है। इसके बाद अंतिम सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा। इस बार कॉमर्स में 4397, आट्र्स में 3455, साइंस में 3147 और लॉ कॉलेज में 1253 वोटर हैं।

वाणिज्य भवन होगा नया सेंटर

कॉमर्स कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के दौरान अखाड़ा बन जाता है। हंगामे की स्थिति ज्यादा रहती है। ऐसे में विवि प्रशासन ने कॉमर्स में छात्र मतदाताओं का दबाव कम करने के लिए वाणिज्य भवन को नया मतदान केन्द्र बनाने का निर्णय किया, जहां पर एफएमएस, पीजी, पीएचडी स्टूडेंट मतदान करेंगे।

कर्मचारी हड़ताल का चुनाव पर पड़ा असर

विवि में शैक्षणेत्तर कर्मचारियों की पेन एंड टूल डाउन हड़ताल चल रही है जिससे छात्रसंघ चुनाव प्रक्रिया का कामकाज प्रभावित हो रहा है। चुनाव करवाने के लिए 9 कमेटियों में 74 कर्मचारी लगाए गए हैं लेकिन हड़ताल से कामकाज पर असर पड़ रहा है। छात्र कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय को कागजी कार्रवाई बाहर से करवानी पड़ रही है। अगर हड़ताल लम्बी चली तो विवि को भारी मुश्किले उठानी पड़ सकती है।

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शुरू हो गई पार्टियां

छात्रसंघ चुनाव को लेकर अभी से पार्टियों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि अभी इन पार्टियों में प्रत्याशी के रणनीतिकार और कन्वेसिंग टीम के छात्र हिस्सा ले रहे हैं जिनके खाने-पीने तक की व्यवस्था की जा रही है। कुछ टीमें बनाकर उन्हें ग्रामीण छात्र वोटरों को अभी से अपने-अपने पक्ष में करने की जिम्मेदारियां बांट दी गई है। नामांकन के बाद ये पार्टियां बढ़ जाएंगी।