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उज्जैन. प्रेमछाया नए मार्ग का निर्माण पर छाया गतिरोध दूसरे दिन सोमवार को भी बरकरार रहा। निगम प्रशासन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका। सोमवार को इस मामले पर न तो पार्टी स्तर ना ही निगम आला अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के बीच कोई तालमेल बैठा। वहीं दूसरी ओर महापौर-निगमायुक्त के बीच खुलकर खटपट होने से निगम के इस प्रोजेक्ट सहित कई कामों पर प्रतिकूल प्रभाव पडऩा तय है। इधर मंत्री पारस जैन ने प्रोजेक्ट शुरू करने अधिकारियों को हरी झंडी दे चुके हैं। ऐसे में कयास है कि प्रशासन फिर साइट क्लियर करने ताकत झोंकेगा।
महापौर ने तैश में आकर सामान फिंकवा दिया था
रविवार दोपहर प्रेमछाया पर जारी सड़क निर्माण काम महापौर मीना जोनवाल द्वारा रुकवाने के बाद से काम बंद है। महापौर ने तैश में आकर सामान फिंकवा दिया था। ऐसे में अब निगम प्रशासन ने इस मार्ग को लेकर कोई रुख तय नहीं किया। सोमवार को ठेकेदार ने मौके पर रखे संसाधन उठवा लिए, केवल चूरी व गिट्टी माल पड़ा है। इधर आरएसएस साफ कर चुका है की मस्तराम अखाड़ा स्थित सालों पुराने हनुमानमंदिर से छेड़छाड़ ना हों। इसे बचाकर रोड निकलता हो तो कोई दिक्कत नहीं।
१८० मीटर के मार्ग पर विवादों की लंबी फेहरिश्त
प्रेमछाया से भाट गली तक बनने वाले मात्र १८० मीटर लंबे मार्ग पर विवादों की लंबी फेहरिश्त है।
लंबे समय तक क्षेत्रीय पार्षद व परिसर संचालक के बीच कई बार विवाद हुए। लड़ाई सड़क तक पहुंची।
निगम प्रशासन ने कानूनी लड़ाई लड़कर जमीन अधिगृहीत की।
एक-दो नहीं छह से अधिक बार संचालक ने रोड बनाने के विरोध में हाईकोर्ट से स्थगन लिया।
निगम द्वारा कब्जा लेने के बाद भी मामला हाईकोर्ट में उलझा और काम पेंडिंग रहा।
अब निगम प्रशासन ने पूरी ताकत झोंकी तो अखाड़े के मंदिर व संघ की दखल से काम में रोडा आया।
इसी बीच महापौर ने अधिकारियों के रवैए पर सवाल खड़े कर काम रुकवा दिया।
रविवार को हुए वाक्ये से महापौर-निगमायुक्त में कल ओर बढ़ रही है। जब तक दोनों में तालमेल नही बनेगा। काम शुरु होना मुश्किल है।
इधर भाजपा संगठन ने भी इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।
बनाएंगे संतुलन
&जनप्रतिनिधि हो या अफसर दोनों ही शहरहित की भावना से काम करते हैं। प्रेमछाया के मामले में स्थिति जो भी रही हो, लेकिन हमारा प्रयास रहेगा कि प्रोजेक्ट जरूरी है तो उस पर काम हों। सभी पक्षों में समन्वय व संतुलन बनवाएंगे। जो प्रभावित हो रहे है उन्हें भरोसे में लिया जाएगा।
इकबालसिंह गांधी, नगराध्यक्ष, भाजपा
निगम पीआरओ निजामी सस्पेंड
यूडीए की शिप्रा व त्रिवेणी विहार कॉलोनी हस्तांतरण को लेकर महापौर द्वारा खड़े किए सवाल का विवादित प्रेसनोट जारी करना पीआरओ रईस निजामी को महंगा पड़ गया। सोमवार को निगमायुक्त ने इसे अनुशासनहीनता व उन्हें जानकारी में डाले बगैर निगम के ईमेल से इस तरह की खबर मीडिया में जारी करने पर सस्पेंड कर दिया। उन्हें कंट्रोल रूम में अटैच किया गया है। शुक्रवार को निगम के अधिकृत मेल से एक प्रेसनोट जारी हुआ था। जिसमें यूडीए की कॉलोनी निगम को हैंडओवर किए जाने को लेकर महापौर मीना जोनवाल द्वारा निगमायुक्त के कामकाज पर सवाल खड़े किए थे। साथ ही प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताया था। ये जानकारी निगामयुक्त को लगी तो उन्होंने पीआरओ को तलब किया। पता चला कि उक्त प्रेसनोट जारी तो यूएमसी के मेल से हुआ लेकिन इसे तैयार किसी अनाधिकृत व्यक्ति ने किया था। बस इसी बात पर निगमायुक्त डॉ. विजयकुमार जे. ने पीआरओ निजा़मी को निलंबित कर दिया।
दोनों के विवाद का बने शिकार!
माना जा रहा है कि बीते कुछ दिनों से महापौर-निगमायुक्त के बीच चल रही खटपट का शिकार पीआरओ बन गए। जबकि वे निगम कि हर गतिविधि के सकारात्मक प्रचार करने में कमी नहीं छोड़ते।
Published on:
6 Feb 2018, 10:49 AM IST
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