4 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘आदिपुरुष’ पर भड़के महाकाल के संत, बोले- पवित्र चरित्र को अश्लीलता के साथ परोसा

उनका कहना है कि फिल्म में आवरण और आचरण हमारे ग्रंथों के अनुसार नहीं हैं। जो फिल्मकार पैसा कमाने के उद्देश्य से फिल्म बना रहे हैं और हिंदुओं को भावनाओं को बार-बार आहत कर रहे हैं वे सुधर जाएं।

2 min read
Google source verification
mahakaal_sant_got_angry_on_aadipurush_film_makers.jpg

उज्जैन। बॉलीवुड एक्टर प्रभास और कृति सेनन की मेगा बजट फिल्म आदिपुरुष की सिनेमा घरों में रिलीजिंग के साथ ही आलोचना भी शुरू हो गई है। जहां समीक्षकों ने इस फिल्म को बेहद कमजोर स्क्रिप्टेड फिल्म कहा है, वहीं कई डायलॉग और सीन को लेकर भी सोशल मीडिया पर लोग भड़ास निकालते नजर आ रहे हैं। अब महाकाल लोक नगरी उज्जैन के संतों की नाराजगी भी फिल्म के प्रति सामने आ रही है। बाकायदा वीडियो जारी कर महाकाल के संतों ने फिल्म मेकर्स पर पैसा कमाने के लिए फिल्म बनाने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फिल्म में आवरण और आचरण हमारे ग्रंथों के अनुसार नहीं हैं। जो फिल्मकार पैसा कमाने के उद्देश्य से फिल्म बना रहे हैं और हिंदुओं को भावनाओं को बार-बार आहत कर रहे हैं वे सुधर जाएं।

सेंसर बोर्ड पर उठाए सवाल
संतों ने फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हिंदू धर्म की फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की कैंची बगल में रख दी जाती है, जबकि अन्य धर्मों की फिल्मों में अगर छेड़छाड़ हो जाए तो, तत्काल दृश्य काट दिए जाते हैं। इसके साथ ही संतों ने सेंसर बोर्ड से मांग की है कि बोर्ड में सलाहकार नियुक्त किया जाए।

इसके साथ ही महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि आज के आधुनिक युग में हर क्रिया, वस्तु, मंदिर को केवल उत्पाद माना जाने लगा है। उपार्जन के लिए ही उसका उपयोग किया जा रहा है। श्री और श्रेय साथ होंगे, तभी श्रेष्ठ बनेंगे। किसी भी प्रकार से समाज में विवाद उत्पन्न करके आपको धन तो मिल जाएगा, लेकिन श्रेय नहीं मिल पाएगा।

ये भी पढ़ें:ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के भाई पर जानलेवा हमला, जैसे-तैसे जान बचाकर भागे सत्येंद्र सिंह तोमर

जानें क्या और बोले संत

1. आवरण और आचरण दोनों में मिलावट
उन्होंने यह भी कहा कि आदिपुरुष के आवरण और आचरण दोनों में मिलावट की गई है। हमारे ग्रंथों में प्रभु श्रीराम, मां सीता की वेशभूषा के बारे में एकदम स्पष्ट है कि उनका आवरण और आचरण कैसा था। सेंसर बोर्ड की कैंची सिर्फ हिन्दू धर्म पर ही चलती है, बाकी धर्मों की बात पर क्या होता है तुरंत आपत्ति दर्ज की जाती है और उसे कैंसल कर दिया जाता है। ये विचित्र बात है। सेंसर बोर्ड के पैनल में साधु-संतों का एक सलाहकार नियुक्त होना चाहिए।
- महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद गिरी महाराज

2. हमारी धर्म-संस्कृति का क्या होगा
आदिपुरुष फिल्म को लेकर संत अवधेशपुरी महाराज ने कहा कि ये घोर आश्चर्य का विषय है कि भारतीय फिल्मकार पैसा कमाने के लिए फिल्में बना रहे हैं। फिल्म आदिपुरुष में जगत जननी मां सीता को अलग ही तरीके से दर्शाया गया है। इससे जो हिन्दू फिल्म देखेगा उसकी भावनाएं आहत होंगी। भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, मां सीता शालीनता, भक्ति और मर्यादा का स्वरूप हैं। उनके इतने पवित्र चरित्र को इस प्रकार से अश्लीलता के साथ परोसा जाएगा तो हमारी धर्म-संस्कृति का क्या होगा। फिल्मकार इस प्रकार का दुस्साहस करना बंद कर दें। यह बहुत बड़ा षड्यंत्र है।

- संत अवधेशपुरी महाराज

ये भी पढ़ें: बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज मामले में एसटीएफ विपिन माहेश्वरी एडीजी करेंगे जांच, जोन 3 डीसीपी को पद से हटाया