2 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

97 फीसदी किसानों को नहीं मिला योजना का लाभ

पंप उर्जीकरण योजना

2 min read
Google source verification
97 per cent farmers did not get the benefit of the scheme

97 per cent farmers did not get the benefit of the scheme

उमरिया.किसानों की खेती के विकास के लिए पिछले तीन वर्षों से संचालित मुख्यमंत्री स्थाई पंप कनेक्शन योजना के तहत जिले में अभी तक मात्र तीन हजार किसानों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है। जबकि किसानों की संख्या यहां लगभग 1 लाख 25 हजार है। इस वर्ष अभी तक कुल 90 किसानों के आवेदन आए हैं। इनमें से मात्र 30 को लाभ दिया जा सका है, शेष 60 किसानों को अभी लाभ दिया जाना शेेष है। बताया गया कि इनकी प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हुई है। विद्युत मण्डल द्वारा संचालित इस योजना में किसानों को सिंचाई के लिए स्थाई पंप कनेक्शन देने ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराया जाता है। जिसका प्रावधान यह है कि जिन किसानों के पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है उनसे विद्युत मण्डल द्वारा 26 हजार 9 सौ रुपए तथा जिनके पास इससे अधिक जमीन है, उनसे 39 हजार 950 रुपए जमा कराए जाते हैं। इसके बाद ट्रांसफार्मर स्थापित कर दिया जाता है। जिले में चूंकि सिंचाई के साधन नाममात्र के ही हैं और मात्र 20 फीसदी रकबा ही सिंचित है इसलिए किसानों को सिंचाई के छोटे-छोटे साधन उपलब्ध कराकर लाभान्वित किया जाना है। ताकि किसान खेतों की सिंचाई कर अच्छी पैदावार ले सके। ज्ञातव्य है कि जिले मे लगभग 57 हजार हेक्टयर रकबे में कृषि की जाती है।
दस प्रतिशत ही जमा करना पड़ता है अनुदान
बताया गया कि मुख्यमंत्री पंप कनेक्शन योजना द्वारा किसानों को बोरिंग कराने के बाद स्थाई कनेक्शन और भरपूर विद्युत सुविधा के लिए ट्रांसफार्मर प्रदान किए जाते हैं। जिसमें लगभग ढाई से तीन लाख के मध्य प्राक्कलन तैयार होता है। जिसका मात्र दस प्रतिशत किसान को जमा करना पड़ता है। शेष शासन द्वारा किसान को अनुदान प्रदान किया जाता है। मात्र 26 हजार नौ सौ अथवा 39 हजार 950 रुपए में उसे ट्रांसफार्मर प्राप्त हो जाता है। किसानों को तीन हार्सपावर अथवा पांच हार्स पावर के पंप लगाने पड़ते हैं।
जानकारी न होने से गति धीमी
जिले में लघु व मध्यम श्रेणी के किसानों की संख्या 80 हजार से भी अधिक है और यही किसान सर्वाधिक रूप से परेशान होते हैं। इस कारण शासन ने इन किसानों को राहत पहुंचाने तथा उनका जीवन स्तर सुधारने योजना क्रियान्वित की, लेकिन योजना का अधिक प्रचार-प्रसार नहीं होने से इसकी जानकारी कम लोगों तक पहुंच सकी है। न तो कृषि विभाग और न ग्राम पंचायते इसमें रुचि लेती हैं। यही कारण है कि अभी तक मात्र तीन हजार किसान लाभान्वित हो सके। इस वर्ष तो अभी तक स्थिति और भी कमजोर है। आधा साल बीत रहा है और अभी तक मात्र 90 किसानों ने ही प्रयास किया। जिनमें से 60 की प्रक्रिया ही पूर्ण नहीं हो पा रही है। प्रक्रिया में भी छह माह की अवधि निर्धारित है।
इनका कहना है
पंप उर्जीकरण प्रक्रिया की अवधि छह माह की रहती है। जिन किसानों की इस वर्ष प्रक्रिया चल रही है उनकी प्रक्रिया जल्दी पूर्ण कर ली जाएगी। पंप चलाने के बाद जो बिल आता है उसका भुगतान स्वयं किसान को करना पड़ता है।
एसएस बघेल, कार्यपालन यंत्री विद्युत मंडल, उमरिया।