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गुरू के ज्ञान से होती है शिष्य की मंजिल आसान

गुरुपूर्णिमा पर्व पर हवन यज्ञ पश्चात हुआ भंडारा

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The knowledge of a guru is done by the disciple's destination

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उमरिया. गुरु जो हमें सत्यमार्ग पर ले जाकर परमपिता परमेश्वर से साक्षात् कराता है, ऐसी शक्ति का पूजन अर्चन बड़े हर्षोल्लास के साथ गायत्री परिवार द्वारा सम्पन्न कराई गयी। इस अवसर पर प्रात: कालीन ब्रम्ह मुहुर्त में ध्यान पूजा, जप, प्रज्ञायोगाह गायत्री महायज्ञ, मध्यान्ह भोजन आदि आयोजन हुये। इसके बाद सांयकालीन यज्ञ के साथ कार्यक्रम सम्पन हुआ। इस अवसर पर गायत्री परिवार ने भंडारे का आयोजन किया। जिसमें पुरुष, महिलाओं व बच्चों ने प्रसाद ग्रहण किये। इस धार्मिक कार्यक्रम में प्रमुख रुप से गायत्री परिवार के परिजन सूर्य प्रकाश गौतम, आरडी साकेश, दयाराम कुशवाहा, आईडी सिंह, बीएफ चक्रवर्ती, विश्वनाथ यादव, रामविशाल तिवारी, दयाराम राय, गोपाल तिवारी, मनोज विश्वकर्मा, बसंत प्रसाद वर्मा, अखिलेश भट्ट, रामगोपाल शर्मा, मुनी प्रसाद, उमेश्वरी देवी, सोमवती आदि शामिल रहे।
बुजुर्गों को केरला के विमल ने किया मोटीवेट
बिरसिंहपुर पाली. संत जोसेफ स्कूल में गुरू पूर्णिमा मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओ के बुजुर्ग परिजनों को स्कूल मे आमंत्रित किया गया है, जिन्हे केरला से आये विमल दास द्वारा मोटीवेट किया गया एवं उनमें उत्साह भरा गया। इस अवसर पर मोटीवेटर विमल दास ने कहा कि रिटायर होने के बाद अक्सर बुजुर्गो के मन में यह बात उठती है कि अब क्या करेंगे। इस पर उन्होने कहा कि रिटायर के बाद उन बुजुर्गो के पास सालों का अनुभव होता है, जो उनके आगें के लिए काम आ सकता है। इस अवसर पर विमल दास ने बुजुर्गो को फिल्म दिखाई। जिसे देखकर बुजुर्गो के मन में उत्साह भर गया। इस अवसर पर वीडियो के माध्यम से दिखाया कि एक व्यक्ति जो दोनो हाथ एवं दोनो पैर से विकलांग था, लेकिन मन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना थी और वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए उस दिशा में चलता रहा। अंत में वह एक मोटीवेटर बना और लोगो को मोटीवेट करने लगा। इसी तरह दूसरा व्यक्ति जो दोनो पैर से विकलांग था, लेकिन मन में लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प था कि वह कुछ कर दिखायेगा जिसके फलस्वरूप वह व्यक्ति बाडी बिल्डर बना। उस बाडी बिल्डर से सोनी टीवी चैनल में आने वाले टैलेंट इंडिया में भाग लिया। वीडियों को देखने के बाद बुजुर्गो ने कहा कि यदि मन मे कुछ कर गुजरने की इच्छाए दृढ़ संकल्प हो तो मंजिल एक दिन जरूर मिलती है। इस अवसर पर बुजुर्गों का सम्मान भी किया गया। इस पर विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें बच्चों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।