
Rahul Gandhi and Akhilesh Yadav
वाराणसी. आमतौर पर चुनाव हारने के बाद पार्टी कमजोर हो जाती है लेकिन सभी के साथ ऐसा नहीं होता है। पार्टी के चुनाव हारने के बाद भी इस नेता का कद तेजी से बढ़ता जा रही है। लोकसभा चुनाव से पहले ही पार्टी को नयी ताकत मिल गयी है। किसी भी दल के लिए इन नेता को अब नकारना कठिन होगा। राहुल गांधी व अखिलेश यादव ने भी इस नेता की ताकत को मान लिया है।
यह भी पढ़े:-मुलायम सिंह यादव के ऐलान से आजमगढ़ को लगा तगड़ा झटका, अब इस बाहुबली को मिल सकता है फायदा
यूपी में लोकससभा चुनाव 2014 का निर्णय ऐतिहासिक था। सपा मात्र तीन सीट पर सिमट गयी थी जबकि बसपा का खाता तक नहीं खुला था। उसम समय माना जा रहा था कि बसपा सुप्रीमो मायावती की ताकत खत्म हो रही है। पीएम नरेन्द्र मोदी सरकार में यूपी में तीन उपचुनाव हुए। सीएम योगी आदित्यनाथ व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या अपने संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव हार गये। कैराना में हुए उपचुनाव में अतीज सिंह के प्रत्याशी को जीत मिली। बसपा ने कही पर उपचुनाव नहीं लड़ा और अपना समर्थन देकर दूसरे दल को चुनाव में विजय दिलायी। वर्तमान समय में बसपा के पास एक भी संसदीय सीट नहीं है लेकिन दलित वोट बैंक के चलते सभी दलों पर बसपा सुप्रीमो मायावती भारी पड़ रही है।
यह भी पढ़े:-बीजेपी के सहयोगी दल के नेता ने की शिवपाल यादव से मुलाकात, बंद कमरे में हुई वार्ता
राहुल व अखिलेश ने भी मानी ताकत
राहुल गांधी व अखिलेश यादव भी मायावती की ताकत को जानते हैं इसलिए दोनों ही नेता बसपा सुप्रीमो के शरण में आ चुके हैं। कांग्रेस ने एमपी से लेकर राजस्थान व छत्तीसगढ़ में भी बसपा से गठबंधन करने की योजना बनायी है तो अखिलेश यादव ने बड़ा दिल का हवाला देते हुए बसपा गठबंधन में कम सीट पर भी चुनाव लडऩे को तैयार हैं। इससे साफ हो जाता है कि यूपी की राजनीति में फिर से बसपा सुप्रीमो मायावती का डंका बज रहा है। बीजेपी को छोड़ दिया जाये तो अन्य कोई दल खुद को बसपा से आगे होने का दावा करने में भी असमर्थ है।
यह भी पढ़े:-खुद के पैसे से बनवाया शौचालय, फीता काट कर किया उद्घाटन, बाढ़ से बचाने के लिए हुई पूजा
चुनाव हार से सबसे कमजोर हुए अखिलेश
यूपी में पहले संसदीय फिर विधानसभा चुनाव हारने के बाद अखिलेश यादव बेहद कमजोर हो गये हैं। सार्वजनिक मंच से अखिलेश यादव हमेशा बीजेपी को रोकने के लिए बसपा से गठबंधन करने की बात करते हैं लेकिन कभी यह नहीं कहते हैं कि हम पीएम नरेन्द्र मोदी की चुनावी जीत को रोकेंगे। जिस दल को साथ आना है वह आ सकता है। अखिलेश यादव जानते हैं कि लोकसभा चुनाव 2019 में हार मिलती है तो फिर पार्टी को टूट से बचाना बेहद कठिन होगा। मुलायम सिंह की राजनीति में पहले जैसी सक्रियता नहीं रह गयी है और शिवपाल यादव को सही मौका मिलेगा तो बाजी पलट भी सकते हैं।
यह भी पढ़े:-कांग्रेस के नये दांव से उड़ी अखिलेश यादव की नीद, बसपा को लेकर करना पड़ा यह ऐलान
Published on:
16 Jun 2018, 6:08 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.