18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बाहुबली मुख्तार अंसारी की तरह अतीक अहमद भी नहीं कर पायेंगे अपना चुनाव प्रचार

वाराणसी संसदीय सीट पर वर्ष 2009 में मुख्तार अंसारी ने जेल में रहते हुए लड़ा था चुनाव, अतीक की पैरोल अर्जी भी हो चुकी है खारिज

2 min read
Google source verification
ateeq Ahmed and Mukhtar ansari

ateeq Ahmed and Mukhtar ansari

वाराणसी. बाहुबली मुख्तार अंसारी की तरह बाहुबली अतीक अहमद भी अपना चुनाव प्रचार नहीं कर पायेंगे। मुख्तार अंसारी इस बार संसदीय चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन वर्ष 2009 में वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था और जेल में रहने के कारण अपना चुनाव प्रचार करने नहीं आ पाये थे इसी तरह अतीक अहमद भी चुनाव प्रचार करने नहीं आयेंगे। कोर्ट ने उनकी पैरोल अर्जी को पहले ही खारिज कर दिया है।
यह भी पढ़े:-पीएम नरेन्द्र मोदी ने मायावती को लेकर दिया बड़ा बयान, अखिलेश यादव की बढ़ सकती परेशानी


अतीक अहमद के चुनाव प्रचार में नहीं आने से उनकी राह कठिन हो सकती है। अतीक अहमद ने पहले शिवपाल यादव की पार्टी से नामांकन करने की तैयारी की थी लेकिन शिवपाल यादव ने अतीक अहमद को टिकट नहीं दिया था जिसके बाद अतीक ने निर्दल ही नामांकन दाखिल किया है। अतीक अहमद को किसी पार्टी से टिकट मिलता तो चुनाव प्रचार करने के लिए उस दल की कार्यकर्ताओं की फौज रहती। लेकिन निर्दल लडऩे से कार्यकर्ताओं को जुटाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। अतीक के भाई व बेटे पर पहले ही पुलिस ने शिकंजा कसा हुआ है इसलिए उनके चुनाव प्रचार के लिए आने की संभावना बेहद कम है। बाहुबली अतीक अहमद भले ही बनारस से चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन यहां पर आकर चुनाव प्रचार करना उनके भाग्य में नहीं है।
यह भी पढ़े:-पीएम नरेन्द्र मोदी ने राजा भैया को दिया बड़ा झटका, चुनाव में बढ़ जायेगी परेशानी

बाहुबली मुख्तार अंसारी को मिला था बसपा कार्यकर्ताओं का साथ
बाहुबली मुख्तार अंसारी ने वर्ष 2009 में बीजेपी के दिग्गज नेता डा.मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ बनारस संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था। मुख्तार अंसारी की बनारस में अपनी पकड़ थी इसके बाद बसपा प्रत्याशी होने से पार्टी के कार्यकर्ताओं का भी साथ मिला था जिसके चलते जेल में रहते हुए भी मुख्तार अंसारी ने डा.जोशी को जबरदस्त टक्कर दी थी। इसके चलते डा.मुरली मनोहर जोशी जैसा दिग्गज नेता 20 हजार से कुछ अधिक वोटों से ही चुनाव जीत पाया था।
यह भी पढ़े:-संघ व भगवा सेना ने बनारस में वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए कसी कमर, बनायी यह योजना