
बसपा नेता राजेश यादव की हत्या
इलाहाबाद. यूपी के इलाहाबाद में क बसपा नेता राजेश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ताराचंद हॉस्टल परिसर में गोली मारी गयी। घायलावस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। शहर में उस वक्त हालात बेकाबू हो गए जब बहुजन समाज पार्टी के पूर्व प्रत्याशी राजेश यादव के हत्या की सूचना उनके कार्यकर्ताओं तक पहुंची। रजेश यादव ज्ञानपुर भदोही के रहने वाले थे। भदोही क्षेत्र में राजेश यादव का काफी रसूख था। वह बाहुबली विधायक विजय मिश्रा के घोर प्रतिद्वंदी माने जाते थे। हालांकि अभी उनकी हत्या के पीछे किसी राजनीतिक रंजिश की बात सामने नहीं आ रही है।
राजेश यादव को सोमवार की देर उस समय गोली मारी गई जब वह अपने कारोबारी मित्र डॉक्टर मुकुल सिंह के साथ फार्च्यूनर कार से इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ताराचंद हॉस्टल गए थे। भदोही के दुगुना गांव निवासी राजेश यादव 2017 में ज्ञानपुर विधानसभा से बसपा के बैनर पर बाहुबली विधायक विजय मिश्रा के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे। साथ ही बसपा ज्ञानपुर विधानसभा के प्रभारी भी थे। हालाकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। की डॉ मुकुल और राजेश देर रात हास्टल क्यों गये थे। इन दिनों विवि में छात्रसंघ चुनाव चल रहा है। और तारा चन्द्र हॉस्टल में एक अध्यक्ष प्रत्याशी सहित एक महामंत्री का चुनाव कार्यालय बनाया गया है।
देर रात मारी गई गोली
राजेश सिविल लाइंस इलाके में कम्पनी बाग के पीछे हरितकुंज अपार्टमेंट में रहते थे। डॉ. मुकुल सिंह का भी वहीं अपना निजी नर्सिंग होम है। डॉ. मुकुल शहर के प्रतिष्ठित परिवार से हैं। हालांकि उनके नर्सिंग होम को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहते हैं। राजेश की पत्नी के मुताबिक डॉ. मुकुल राज नर्सिंग होम के मालिक और राजेश देर रात ताराचंद हॉस्टल में किसी से मिलने गए थे। देर रात राजेश को फोन किया तो उन्होंने बताया की मुकुल के साथ बगल में राज नर्सिंग होम में बैठे हैं। राजेश की पत्नी का दावा है कि राजेश के हाथ से मुकुल ने फोन ले लिया और यह कहा कि मैं राजेश को दारु पिला रहा हूं, लेकिन वह पी नहीं रहे। उसके बाद ही फोन ऑफ़ हो गया और लगभग 2.30 बजे रात को ताराचंद्र हॉस्टल में किसी से उनका विवाद हुआ, जिसके बाद उनपर हमला हुआ और उन्हें गोली मार दी गयी। गोली पेट में लगी जिससे राजेश गंभीर रूप से जख्मी हो गए। डॉक्टर मुकुल जख्मी हालत में उन्हें राज नर्सिंग होम ले गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि बसपा नेता की गाड़ी में भी कुछ खोखे मिले हैं और गाड़ी पर पीछे से ईंट पत्थर भी मारे गए।
संदेह के घेरे में डॉक्टर मुकुल सिंह
राजेश यादव की हत्या के बाद डॉक्टर मुकुल सिंह संदेह के घेरे में हैं। राजेश की पत्नी ने आरोप लगाया है कि जब दोनों एक ही गाड़ी में थे तो केवल राजेश को ही चोटें क्यों आयीं और गोली लगी, जबकि डॉ. मुकुल को खरोंच तक नहीं आयी। उनका कहना है कि डॉक्टर मुकुल ने अपने नर्सिंग होम में बिठाकर जबरदस्ती राजेश को शराब पिलाई और ताराचंद हास्टल ले गए। बकौल राजेश यादव की पत्नी दोनों में व्यापारिक संबंध थे, इसलिए दोनों का उठना बैठना होता था। आपको बता दें कि जिस अपार्टमेंट में राजेश यादव रहते थे उसके एक मकान के बाद ही डॉक्टर मुकुल सिंह का अपना नर्सिंग होम है। जैसे ही राजेश के समर्थको को यह पता चला की राजेश यादव की मौत हो गई है। भदोही से लेकर स्थानीय समर्थक और रिश्तेदार जुटने लगे।
कई राउंड चली गोलिया
शहर के इन्डियन प्रेस चौराहे से लेकर आस पास के इलाके में जमकार तांडव हुआ। हत्या की सूचना पर बवाल कर रहे हैं कार्यकर्ताओं ने इंडियन प्रेस चौराहे से लेकर हरित कुंज जहां पर राजेश यादव रहते थे, वहां तक पूरे इलाके में जाम लगा दिया। जमकर तोड़फोड़ की एक सिटी बस को आग के हवाले करते हुए दर्जनों छोटे बड़े वाहनों तोड़ दिये गए। इस दौरान राजेश समर्थकों ने कई राउंड गोलियां चलाईं। यही नहीं घटनास्थल से सौ मीटर दूर कर्नलगंज थाने की पुलिस आधे घंटे बाद पहुंची तो समर्थकों की भीड़ उनपर भी टूट पड़ी। कई पुलिस वालों के साथ कई पत्रकार भी पीटे गए और मोबाइल तोड़ दिया गया। पुलिस पर पथराव हुआ। घंटों पुलिस तमाशबीन बनी रही। मौके पर हालात और बेकाबू होता देख कप्तान ने कई थानों की फोर्स बुलायी। अपार्टमेंट सहित पूरे इलाके को चारों तरफ से घेरकर लोगों को हिरासत में लेना शुरू किया। इस दौरान पुलिस ने भी जमकर लाठियां बरसाई और राजेश समर्थकों ने कई राउंड गोलियां भी चलाई।
योगी शासन में लगातार जिले में हुई हत्याएं
योगी सरकार बनने के बाद भले ही तमाम दावे कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की किए जा रहे हों, लेकिन सरकार और शासन दोनों ही नाकाम साबित होते दिख रहे हैं। बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिस दिन यूपी के मुख्यमंत्री की शपथ ली थी उसी दिन जिले के मऊआइमा थानान्तर्गत बहुजन समाज पार्टी के ब्लॉक प्रमुख मोहम्मद शमी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यही नहीं जिले के नवाबगंज थानान्तर्गत एक ही परिवार के चार लोगों की नृशंस हत्या का भी मामला सामने आया। अपराधिक गतिविधियां यहीं नहीं रुकीं, मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के प्रथम दौरे से पहले देर रात पुलिस लाइन के सामने एक ठेकेदार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दो दिन बाद ही फिर इलाहाबाद के बस स्टैंड पर एक व्यवसाई की गोली मारकर हत्या की गई। लगातार इस तरीके की अपराधिक घटनाओं से तो साफ जाहिर होता है। कि सरकार के दावे फेल हैं और पुलिस ऐसी घटनाओं को रोक पाने में नाकाम है, इससे अपराधियों के हौसले आप भी बुलंद हैं।
राजू पाल की हत्या के बाद शहर में लगी थी आग
किसी नेता की हत्या के बाद यह पहली बार नहीं है। कि शहर में खुलेआम तांडव हुआ है। इसके पहले बहुजन समाज पार्टी के विधायक राजू पाल की हत्या इसी शहर में सरेराह कर दी गई थी। इस मामले में प्रदेश के बाहुबली नेता अतीक अहमद को आरोपी बनाया गया। इस मामले में लंबी लड़ाई लड़ने के बाद पूर्व विधायक पूजा पाल की अपील पर सीबीआई जांच का भी आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया है। बाहुबली अतीक अहमद की सारी जमानत खारिज करने के बाद बाहुबली जेल में है। और उनका भाई पूर्व विधायक मोहम्मद अशरफ जो राजू पाल हत्याकांड का आरोपी है। वह आज भी पुलिस को चकमा देने में कामयाब है और फरार है।
पहले भी चुनाव के दौरान हुई है हत्या
2006 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के चुनाव के दरमियान समाजवादी छात्र सभा के प्रत्याशी रहे कमलेश यादव की वोटिंग वाले दिन गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कमलेश यादव शहर के जाने माने डॉक्टर यूबी यादव के भतीजे थे। उस वक्त भी पूरे शहर को कार्यकर्ताओं ने आग के हवाले कर दिया था।कमलेश यादव हत्याकांड का आरोप विश्वविद्यालय के तत्कालीन उपाध्यक्ष मनोज सिंह पर आया । मनोज सिंह इस मामले में 5 साल तक जेल में रहे। इन दिनों जौनपुर से ब्लॉक प्रमुख हैं।और भारतीय जनता पार्टी के नेता है। समाजवादी पार्टी के लंबे संघर्षों के बाद 2012 में 6 साल बाद छात्र संघ बहाल किया गया। लेकिन एक बार फिर पूरब के एक्सपोर्ट के ऐतिहासिक छात्रसंघ की प्राचीर पर खून के धब्बे लगे हैं।
विश्वविद्यालय की प्राचीर खून के धब्बों से फिर हुई दागदार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति का ऐतिहासिक सफ़र रहा है। विश्वविद्यालय की प्राचीर से लालकिले की प्राचीर तक जाने का भी सफर यहां के छात्र नेताओं ने तय किया है। लेकिन विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति में जिस तरह से आपराधिक समीकरण अपने चरम पर है।और एक बार फिर विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक प्राचीर खून के धब्बों से फिर दागदार हुई है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के दरमियान एक बार फिर उसके ही छात्रावास के कैंपस में किसी की हत्या हो जाना विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन की चुनावी तैयारियों पर भी सवाल उठाता है।
जब दिनदहाड़े गोलिया चली थी
छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए इलाहाबाद में जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन तमाम बैठकर करने के बावजूद भी एक बार फिर असफल साबित हुआ है।इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इसके पहले भी चुनाव के दरमियान हत्या और हत्या के प्रयास होते रहे हैं। कमलेश यादव हत्याकांड के बाद लिंगदोह की सिफारिशों के बावजूद भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अभिषेक सिंह माइकल जेल से चुनाव लड़ता है।और जीत कर आता है। आपको बता दें कि इसके पहले चुनाव में अभिषेक सिंह माइकल जो महामंत्री विश्वविद्यालय रहा है।उसने अभिषेक सिंह सोनू पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थी।दोनों तरफ से दिनदहाड़े फायरिंग की इस घटना में अभिषेक सिंह सोनू और अभिषेक सिंह माइकल दोनों ही घायल हुए।और वर्तमान में दोनों ही प्रदेश के अलग.अलग जिलों में हत्या के प्रयास के मामले में जेल में बंद है। इसके बावजूद भी जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र राजनीति के अपराधीकरण पर नकेल कसने में नाकामयाब साबित हुई है।
हत्या और बवाल के बाद क्या बोले सएसपी
एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने कहा की इस मामले के सभी बिन्दुओ पर जाँच की जा रही है।इस मामले में परिजन जिसे आरोपी बनायेंगे जिसके नाम तहरीर देंगे।वः कोई भी उनकी गिरफ्तारी की जायेगी। पूरी जांच के बाद ही आगे कुछ कहा जा सकता है।मामले का दोषी कोई भी हो। उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा।
by PRASOON PANDEY
Updated on:
03 Oct 2017 05:50 pm
Published on:
03 Oct 2017 05:27 pm
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