निकाय चुनाव के चलते ४८ घंटे पहले ही शराब की दुकानों को बंद करा दिया गया है। प्रत्याशियों ने पहले से ही शराब का व्यापक स्तर पर प्रबंध कर लिया था। कई प्रत्याशी तो ऐेसे भी हैं, जिनका शराब दुकानदार के मालिको से सीधा सम्पर्क है और ऐसे लोगों ने प्रत्याशियों के लिए सुरक्षित जगह पर पहले से ही कई पेटी शराब पहुंचा दी थी, जिसके चलते शराब की दुकान बंद होने का प्रत्याशियों पर अधिक असर नहीं पड़ा। विभिन्न वार्ड में प्रत्याशियों ने जन्मदिवस, शादी की सालगिरह आदि बहाने के सहारे बड़ी पार्टी का आयोजन किया था, जहां पर शराब के साथ वेज व नॉनवेज दोनों की व्यवस्था थी। बाटी-चोखा की पार्टी तो आम हो चुकी है। वार्ड के लोगों के लिए सुबह के नाश्ते तक का प्रबंध प्रत्याशियों ने कर दिया था। प्रत्याशियों ने जिस तरह से पैसा खर्च किया है उससे नहीं लग रहा है कि नोटबंदी का इन लोगों पर असर हुआ है।
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