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Central Jail Varanasi: एक समय था जब अपराध जगत से जुड़े लोगों के लिए कहावत बनी थी 'सुधर जाओ वरना जेल की रोटी खानी पड़ेगी', लेकिन आज जेल का बना सामान खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतार है लग रही है। वाराणसी में स्थित केंद्रीय कारागार द्वारा संचालित दुकान आज शुद्धता और स्वाद का नया पता बन चुकी है। यहां बिकने वाले शुद्ध देसी घी, सरसों का तेल चटपटा अचार, ताजा ब्रेड, बिस्कुट और क्रीम रोल की बाजार में जबरदस्त डिमांड है।
वाराणसी के केंद्रीय कारागार में निर्मित सामग्रियां जेल में बंद कैदियों के हुनर और 100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी के साथ तैयार की जाती है। इसके बदले कैदियों को मासिक मजदूरी मिलती है, जिससे उनके परिवार का भरण पोषण भी होता है। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई लिखाई में भी बंदी जेल में रहते हुए अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। अपराध का रास्ता छोड़कर यहां बंद कैदी आत्मनिर्भरता और अपने को बेहतर भविष्य की ओर बढ़ा रहे हैं। इसमें जेल प्रशासन कैदियों का पूरा सहयोग कर रहा है और जेल प्रशासन के सहयोग से ही जेल में बंद कैदियों का भविष्य संवार रहा है।
सेंट्रल जेल वाराणसी के वरिष्ठ जेल अधीक्षक राधा कृष्ण मिश्रा ने बताया कि सेंट्रल जेल सिर्फ कारागार ही नहीं बल्कि एक औद्योगिक कारगर है। यहां पर बेकरी का उद्योग भी चलता है, जिसमें बिस्किट, क्रीम रोल, क्रीम ब्रेड, सदा ब्रेड इत्यादि का निर्माण किया जाता है। इसके अलावा सेंट्रल जेल में आचार और मुरब्बा का विभाग भी है, जिसमें इनका निर्माण होता है। इनमें विभिन्न प्रकार के अचार का निर्माण किया जाता है, जिनमें मुख्य रूप से आम, कटहल, मिक्स अचार शामिल है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कारागार में फर्नीचर का उद्योग भी है, जिसमें सोफे और कुर्सियों का निर्माण किया जाता है। सेंट्रल जेल की बनी हुई कुर्सियां कई सरकारी दफ्तर में इस्तेमाल में लाई जाती हैं।
उन्होंने बताया कि सेंट्रल जेल में खेती भी की जाती है और इन पूरे व्यवसाय में करीब 850 बंदी हैं जो हाथ बटाते हैं। इसके लिए सामग्री जेल प्रशासन उपलब्ध कराता है और यह कैदियों के रोजगार का एक साधन भी बन चुका है। उन्होंने बताया कि इन सामग्रियों के बिक्री के लिए केंद्रीय कारागार के पास ही एक स्टॉल का निर्माण कराया गया था, लेकिन सिर्फ बंदी से मिलने आने वाले लोग ही उन सामग्रियों को खरीदते थे। इस वजह से बिक्री अच्छी नहीं होती थी। उन्होंने बताया कि इसी वजह से मुख्य सड़क पर स्थित प्राचीन काली माता मंदिर के पास स्टॉल का निर्माण किया गया।
जेल अधीक्षक ने बताया कि जब से स्टॉल का निर्माण किया गया है तब से जेल में निर्मित होने वाले सामग्रियों की बिक्री काफी ज्यादा बढ़ गई है, जिनमें घी, बिस्कुट, ब्रेड इत्यादि की सबसे ज्यादा डिमांड की जा रही है। सबसे ज्यादा घी की डिमांड है, क्योंकि यह पूर्ण रूप से शुद्ध होता है। उन्होंने बताया कि सिर्फ एक स्टॉल पर जेल के सामने 20 से 30 हजार रुपए की बिक्री होती थी, लेकिन जब से स्टॉल को शिफ्ट किया गया है 60 से 70 हजार रुपए की आमदनी एक स्टॉल से की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सेंट्रल जेल में बंद कैदी लंबी अवधि के होते हैं और ऐसे में उनके परिवार आर्थिक स्थिति से जूझ रहे होते हैं। इसी वजह से बंदियों को यह सुविधा दी गई है, जिससे वह कमाई करके अपने परिवार का भरण पोषण भी करते हैं। जेल प्रशासन इन सामग्रियों के बदले कैदियों को उचित मजदूरी प्रदान करता है और इन पैसों को वे अपने परिजनों को सौंप देते हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल प्रशासन के सहयोग से एक बड़ा सामाजिक दायित्व निभाने का कार्य किया जा रहा है।
Updated on:
08 Aug 2026 01:47 pm
Published on:
08 Aug 2026 01:47 pm
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