वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ से वफादारी करने का पुरस्कार गोरखपुर के जिलाधिकारी राजीव रौतेला को मिल गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने जिले के डीएम को हटा कर देवीपाटन का कमिश्रर बनाया गया है। जिलाधिकारी के पास एक जिला होता है जबकि कमिश्रर के पास कई जिले होते हैं।
गोरखपुर व फूलपुर उपचुनाव में हार मिलने के बाद भी सीएम योगी ने जाति कार्ड खेल दिया है। सीएम योगी के खास माने जाने वाले गोरखपुर के जिलाधिकारी रहे राजीव रौतेला पिछले कुछ समय से चर्चा में है। सबसे पहले हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आईएएस राजीव रौतेला चर्चा में आये थे जब हाईकोर्ट ने रामपुर में अवैध खनन मामले में राजीव रौतेला पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था जिसके बाद भी सीएम योगी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की थी और बाद में सीएम योगी ने राजीव रौतेला को अपने क्षेत्र गोरखपुर की जिम्मेदारी दे दी थी। गोरखपुर उपचुनाव में बीजेपी को करारी शिकस्त मिली है। गोरखपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी राजीव रौतेल पर जान कर चुनाव परिणाम को नहीं जारी करने का आरोप लगा था। विरोधी दलों का आरोप था कि तत्कालीन जिलाधिकारी ने एक पर्यवेक्षक पर मतगणना की गलत परिणाम जारी करने के लिए दबाव बनाया था लेकिन महिला पर्यवेक्षक ने चुनाव परिणाम वाले कागज पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था हालांकि अभी इस बात की अधिकारियों पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच मीडिया में चुनाव परिणाम जारी करने में देरी की खबर को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया और आईएएस राजीव रौतेला को नोटिस भी दिया है। गोरखपुर उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार के बाद कयास लग रहे थे कि गोरखपुर के जिलाधिकारी पर गाज गिर सकती है लेकिन सीएम योगी ने तरीके से गोरखपुर के जिलाधिकारी को हटा कर देवीपाटन का कमिश्रर बना कर एक तरह से प्रमोशन दे दिया है।
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