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सीएम योगी से वफादारी निभाने का मिला इस आईएएस को इनाम, डीएम से बनाया कमिश्रर

गोरखपुर उपचुनाव में परिणाम जारी करने पर हुई देरी पर चुनाव आयोग ने दिया था नोटिस, सीएम योगी ने एक बार फिर खेला जाति कार्ड
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 17 Mar 2018, 1:27 PM IST

CM Yogi Adityanath and IAS Rajeev Rautela

CM Yogi Adityanath and IAS Rajeev Rautela

वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ से वफादारी करने का पुरस्कार गोरखपुर के जिलाधिकारी राजीव रौतेला को मिल गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने जिले के डीएम को हटा कर देवीपाटन का कमिश्रर बनाया गया है। जिलाधिकारी के पास एक जिला होता है जबकि कमिश्रर के पास कई जिले होते हैं।
गोरखपुर व फूलपुर उपचुनाव में हार मिलने के बाद भी सीएम योगी ने जाति कार्ड खेल दिया है। सीएम योगी के खास माने जाने वाले गोरखपुर के जिलाधिकारी रहे राजीव रौतेला पिछले कुछ समय से चर्चा में है। सबसे पहले हाईकोर्ट के निर्देश के बाद आईएएस राजीव रौतेला चर्चा में आये थे जब हाईकोर्ट ने रामपुर में अवैध खनन मामले में राजीव रौतेला पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था जिसके बाद भी सीएम योगी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की थी और बाद में सीएम योगी ने राजीव रौतेला को अपने क्षेत्र गोरखपुर की जिम्मेदारी दे दी थी। गोरखपुर उपचुनाव में बीजेपी को करारी शिकस्त मिली है। गोरखपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी राजीव रौतेल पर जान कर चुनाव परिणाम को नहीं जारी करने का आरोप लगा था। विरोधी दलों का आरोप था कि तत्कालीन जिलाधिकारी ने एक पर्यवेक्षक पर मतगणना की गलत परिणाम जारी करने के लिए दबाव बनाया था लेकिन महिला पर्यवेक्षक ने चुनाव परिणाम वाले कागज पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था हालांकि अभी इस बात की अधिकारियों पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच मीडिया में चुनाव परिणाम जारी करने में देरी की खबर को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया और आईएएस राजीव रौतेला को नोटिस भी दिया है। गोरखपुर उपचुनाव में बीजेपी को मिली हार के बाद कयास लग रहे थे कि गोरखपुर के जिलाधिकारी पर गाज गिर सकती है लेकिन सीएम योगी ने तरीके से गोरखपुर के जिलाधिकारी को हटा कर देवीपाटन का कमिश्रर बना कर एक तरह से प्रमोशन दे दिया है।
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सीएम योगी सरकार में काम करने वाले आईएएस अधिकारी पर तुरंत होती है कार्रवाई
सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार को ऐसे ही उपचुनाव में हार नहीं मिली है मात्र साल भर के शासन में ही जनता को बीजेपी से मोहभंग होने लगा है। पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में वीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष पुलकित खरे ने वरुणा कॉरीडोर पर बड़े लोगों के अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी चलवा दी थी फिर क्या बीजेपी के एक विधायक नाराज हुए ओर सीएम योगी से आईएएस पुलकित खरे की शिकायत कर दी। इसके बाद तरीके से पुलकित खरे को वीडीए के वीसी पद से हटा कर हरदोई का जिलाधिकारी बना दिया। समाज में संदेश गया कि आईएएस को एक जिले के मालिक बना दिया गया है जबकि सच्चाई थी कि वरुणा कॉरीडोर में बड़े लोगों के अतिक्रमण को बचाने के लिए ही युवा आईएएस को हटाया गया था। इसी तरह देखने में लगेगा कि गोरखपुर के जिलाधिकारी को हटा दिया गया है जबकि सच्चाई है कि उन्हें प्रमोट कर दिया गया है। मजेदार बात तो यह है कि सपा सरकार के तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव पर सीएम योगी से लेकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता तो जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगाते थे।
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