2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मोदी और अमित शाह से डरा विपक्ष, गठबंधन में दिखने लगा बिखराव

बदले अखिलेश और माया के बोल, कांग्रेस ने साधी चुप्पी।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

वाराणसी

•

image

Ajay Chaturvedi

•

Updated: 19 Jun 2018, 4:11 PM IST

नरेंद्र मोदी, अखिलेश, मायावती, राहूल

नरेंद्र मोदी, अखिलेश, मायावती, राहूल

वाराणसी. आगामी लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को मात देने को तैयार हो रहे महागठबंधन में अभी से दरार पड़ने लगी है। खास तौर पर यूपी की बात करें तो दोनों क्षेत्रीय दलों के नेतृत्व ने फिलहाल कांग्रेस से दूरी बनानी शुरू कर दी है। केवल यूपी ही नहीं अब तो मध्य प्रदेश में भी इन दलों ने सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। इतना ही नहीं 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ दोस्ती करने वाले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयानों से जो संकेत निकल रहे हैं वह कांग्रेस के लिए अच्छे नहीं हैं। ऐसे में कम से कम यूपी और मध्यप्रदेश में फिलहाल तो गठबंधन टूटता ही नजर आ रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सब पीएम मोदी और अमित शाह की रणनीति के चलते है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह दूर की कौड़ी हो सकती है। सपा हो या बसपा, यानी मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और मायावती फिलहाल बीजेपी यानी नरेंद्र मोदी और अमित शाह से कोई पंगा नहीं लेना चाहते। उन्हें भय सता रहा है कि अगर एकजुटता की बात की जाती है और उसमें कांग्रेस को भी शामिल किया जाता है तो नुकसान उनका ही होगा। खास तौर पर मुलायम सिंह और मायावती पर। उनके खिलाफ डब्बे में बंद फाइलें कभी भी खुल सकती है। लिहाजा कांग्रेस से दूरी बनाना ही श्रेयस्कर होगा।

राजनीतिक विश्लेषक यह भी बताते हैं कि इस बीच दोनों ही दल अकेले-अकेले चुनाव लड़ कर अपनी ताकत का अंदाजा भी लगा लेंगे। फिर अगर गठबंधन बनता भी है तो ये अपनी-अपनी हैसियत के मुताबिक दावा करेंगे। ऐसे में यह नूरा कुश्ती भी हो सकती है। लेकिन सबसे बड़ा मसला इनकी पिछली फाइलें ही हैं। वो कहते हैं कि अभी ही जिस तरह से यूपी सरकार ने जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास खाली कराने का सिलसिला शुरू कराया और अखिलेश यादव पर जिस तरह से आरोप लगे उसे वो पीएम मोदी, अमित शाह की रणनीति का ही हिस्सा मान रहे हैं।

ऐसे में यह बिखराव कम से कम तब तक दूर नहीं होता दिखेगा जब तक कि लोकसभा चुनाव की घोषणा नहीं हो जाती है। ये भी रणनीति हो सकती है कि एक बारगी चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार कुछ खास कर नहीं पाएगी और तब गठबंधन करने में कोई हर्ज नहीं होगा। तब तक हर दल को अपनी अपनी ताकत का एहसास भी हो चुका होगा। ऐसे में टिकट बंटवारे में भी कोई खास दिक्कत नहीं होगी।

बड़ी खबरें

View All

वाराणसी

उत्तर प्रदेश