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इस सीट पर अखिलेश यादव व केशव प्रसाद मौर्या आ सकते हैं आमने-सामने

लोकसभा चुनाव 2019 में बन सकता है समीकरण, जानिए क्या है कहानी
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वाराणसी

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Devesh Singh

•

Updated: 15 Mar 2019, 2:13 PM IST

Deputy CM Keshav Prasad Maurya and Akhilesh Yadav

Deputy CM Keshav Prasad Maurya and Akhilesh Yadav

वाराणसी. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या व पूर्व सीएम अखिलेश यादव आमने-सामने आ सकते हैं। लोकसभा चुनाव 2019 में नया समीकरण बन रहा है यदि ऐसा होता है तो जबरदस्त चुनावी लड़ाई देखने को मिलेगी। एक तरफ पीएम नरेन्द्र मोदी के नाम पर डिप्टी सीएम वोट मांगेंगे तो दूसरी तरफ बसपा गठबंधन के साथ नयी ताकत में अखिलेश चुनावी मैदान में विरोधी दलों के ललकारेंगे।
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बीजेपी ने प्रदेश के बड़े नेताओं को जिलो का प्रभार सौंपा है। नेताओं को जिन संसदीय सीट पर प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी है वहां की हार व जीत भी उस नेता का भविष्य तय करेगी। यूपी के डिप्ट्री सीएम केशव प्रसाद मौर्या को आजमगढ़ व कानपुर का प्रभारी बनाया गया है। पूर्वांचल की राजनीति में आजमगढ़ सीट पर जबरदस्त चुनावी टक्कर हो सकती है। वर्ष 2014 में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी की लहर के बाद भी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने यहां से चुनाव जीता था। इसके बाद इस सीट से अखिलेश यादव के चुनाव लडऩे की अटकले लग रही है। सपा ने अभी तक अधिकृत रुप से इस सीट पर प्रत्याशी को लेकर कुछ बयान नहीं दिया है लेकिन पार्टी के अंदर ही इस बात की चर्चा है कि यादव व मुस्लिम बाहुल्य सीट से अखिलेश यादव चुनाव लड़ सकते हैं। आजमगढ़ संसदीय सीट से अखिलेश यादव चुनाव लड़ते हैं तो उनका सामना जिले के प्रभारी केशव प्रसाद मौर्या से होगा। यदि ऐसा होता है तो फूलपुर सीट पर हुए उपचुनाव के बाद दोनों ही नेता एक सीट पर आमने-सामने आयेंगे।
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बीजेपी के लिए आसान नहीं रहती है आजमगढ़ की डगर
बीजेपी के लिए आजमगढ़ की डगर आसान नहीं होती है। यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार आ जाने के बाद आजमगढ़ में पार्टी को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई सौगात दी है। एक तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व पीएम नरेन्द्र मोदी की चुनावी रणनीति होगी तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव व मायावती का गठबंधन होगा। ऐसे में अखिलेश यादव इस सीट से प्रत्याशी बनते हैं तो यूपी की सबसे हॉट सीटों में आजमगढ़ संसदीय सीट की गिनती होगी।
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बाहुबली रमाकांत यादव व शिवपाल यादव का दिखेगा चुनाव में प्रभाव
बीजेपी के पास बाहुबली रमाकांत यादव के अतिरिक्त आजमगढ़ में कोई बड़ा नेता नहीं है। इस सीट से बीजेपी किसे टिकट देती है यह अभी तय नहीं है। रमाकांत यादव इस सीट से बीजेपी या अन्य दल से चुनाव लड़ते हैं तो उसका भी प्रभाव पड़ेगा। आजमगढ़ में शिवपाल यादव की सक्रियता भी किसी दल को नुकसान व लाभ पहुंचा सकती है। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि इस सीट पर जबरदस्त चुनावी मुकाबला देखने को मिल सकता है। फूलपुर उपचुनाव में सपा व बसपा गठबंधन से बीजेपी प्रत्याशी को मिली हार कर बदला लेने का डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को मौका मिला है जबकि अखिलेश यादव को मुलायम सिंह यादव की सीट को बचाये रखने की चुनौती होगी। अब देखना है कि चुनाव परिणाम किस नेता के कद को बढ़ायेगा।
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