8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

वाराणसी
महात्मा गांधी ने खुद यहां पर काता था सूत, अनोखा है काशी विद्यापीठ का इतिहास
Play video

महात्मा गांधी ने खुद यहां पर काता था सूत, अनोखा है काशी विद्यापीठ का इतिहास

स्वतंत्रता संग्राम में निभायी थी महत्वपूर्ण भूमिका, जानिए क्या है कहानी
Follow Patrika on Google News
Google source verification

वाराणसी

•

image

Devesh Singh

•

Updated: 26 Jan 2018, 6:02 PM IST

वाराणसी. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का इतिहास अनोखा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने यहां पर खुद सूत काता था और एक सप्ताह तक रह कर देश को आजाद करने की रणनीति बनायी थी। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में भी काशी विद्यापीठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
यह भी पढ़े:-पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में गणतंत्र दिवस की रही धूम



काशी विद्यापीठ की स्थापना 10 फरवरी 1921 को हुई है। राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्त ने महात्मा गांधी से प्रेरणा लेकर ही परिसर की स्थापना की थी। राष्ट्ररत्न ने बिना किसी से आर्थिक सहयोग लिए ही नैतिकता व देश की संस्कृति का ज्ञान देने के लिए एक विशाल परिसर की स्थापना की थी। आजादी की लड़ाई के समय कई क्रांतिकारियों ने काशी विद्यापीठ के छात्रावास में शरण पायी थी और समय-समय पर यही सें स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई का बिगुल भी बजाया जाता था।
यह भी पढ़े:-गणतंत्र दिवस पर आकर्षण का केन्द्र बना बनारस एसएसपी का नन्हा IPS बेटा चीकू भारद्वाज, देखें तस्वीरे

परिसर से जुड़े महापुरुषों की लम्बी है फेहरिस्त
काशी विद्यापीठ से जुड़े महापुरुषों की सूची बहुत लंबी है। राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्ता व महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अतिरिक्त नरेन्द्र देव, भगवानदास जी, डा.सम्पूर्णानंद आदि महापुरुष परिसर से जुड़े रहे। काशी विद्यापीठ का इतिहास प्राचीन होने के साथ गौरवशाली भी है।
यह भी पढ़े:-भारत माता मंदिर में होता अखंड भारत का दर्शन, महात्मा गांधी ने किया था उद्घाटन

परिसर में अब लड़ी जा रही राष्ट्रीय महत्व संस्था की लड़ाई
काशी विद्यापीठ प्रशासन अब राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने की लड़ाई लड़ रहा है। वर्षोे पूर्व नैक की टीम परिसर आयी थी और जब काशी विद्यापीठ के इतिहास की जानकारी हुई तो सदस्यों ने कहा था कि इस संस्था का इतना शानदार इतिहास है कि राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित होनी चाहिए। काशी विद्यापीठ प्रशासन ने इस संदर्भ में केन्द्र व राज्य सरकार को भी प्रस्ताव भेजा है जिस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
यह भी पढ़े:-संत रविदास जयंती के लिए सीएम योगी के साथ राहुल गांधी , अरविंद केजरीवाल व मायावती को आमंत्रण