'मर्सिया' (Marsiya) अरबी के शब्द 'रसा' से बना है। रसा का अर्थ होता है रुलाना। मर्सिया का अर्थ होता है किसी मरने वाले पर अफसोस करना। अरब में इस्लाम के आने से पहले से काव्य की दो विद्याएं थीं। पहला 'मर्सिया' और दूसरा 'कसीदा'। 'कसीदा' (Qaseeda) अरबी के शब्द 'कस्द' से बना है जिसका अर्थ होता है 'इरादा करना'। कसीदा यानि किसी की तारीफ करना। मर्सिया मरने वाले पर अफसोस के लिये होता है। मर्सिया सिर्फ इमाम हुसैन का नहीं होता, यह किसी का भी लिखा जा सकता है।