बीजेपी, अपना दल व राजा भैया के बीच में फंसी यह सीट , सीएम योगी किसे दिलायेंगे टिकट

बीजेपी, अपना दल व राजा भैया के बीच में फंसी यह सीट , सीएम योगी किसे दिलायेंगे टिकट

Devesh Singh | Publish: Apr, 17 2018 04:04:52 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

लोकसभा चुनाव 2019 में बनेगा नया समीकरण, सपा के दूर होने से बढ़ी परेशानी

वाराणसी. बीजेपी, अपना दल व राजा भैया के बीच में यह सीट फंस सकती है। सीएम योगी आदित्यनाथ किसे सीट दिलायेंगे। इस पर अभी सस्पेंस कायम है। अखिलेश यादव व राजा भैया के बीच बढ़ी दूरी से ही नया सियासी समीकरण का जन्म हुआ है। लोकसभा चुनाव में सपा व बसपा गठबंधन की सीधी लड़ाई बीजेपी से है, ऐसे में इस सीट पर किस प्रत्याशी को टिकट मिलता है वही राजनीतिक दल की हार व जीत तय करेगा।
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प्रतापगढ़ के कुंडा विधानसभा से राजा भैया हमेशा निर्दल ही चुनाव जितते हैं। राजा भैया ने कभी संसदीय चुनाव नहीं लड़ा है और भविष्य में लडऩे के संकेत भी नहीं दिये हैं। वर्तमान समय प्रतापगढ़ लोकसभा सीट की बात की जाये तो इस पर अपना दल के कुंवर हरिवंश सिंह का कब्जा है। लोकसभा चुनाव 2014में बीजेपी व अपना दल ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था अपना दल को दो सीट मिली थी और दोनों ही सीट पर अपना दल को जीत मिली थी। प्रतापगढ़ के अतिरिक्त मिर्जापुर से खुद अनुप्रिया पटेल सांसद है। अब लोकसभा चुनाव 2019 आने वाला है और सवाल उठने लगा है कि इस सीट पर किसी टिकट मिलेगा।
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Rajkumari Ratna Singh and Akshay Pratap Singh
IMAGE CREDIT: Patrika

राजा भैया के चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह ने वर्ष 2004 में जीता था चुनाव
राजा भैया के चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह ने वर्ष 204 में सपा के टिकट पर प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। इसके बाद वर्ष 2009 में राजकुमारी रत्ना सिंह ने अक्षय प्रताप को चुनाव हरा कर सीट पर अपना कब्जा किया था। राज्यसभा चुनाव 2018 के बाद मायावती के बयान देने के बाद से अखिलेश यादव व राजा भैया के बीच की दूरी बढ़ गयी है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार अक्षय प्रताप सिंह चुनाव लड़ते हैं तो सपा से उन्हें टिकट नहीं मिलेगा। राजकुमारी रत्ना सिंह पर सपा-बसपा गठबंधन दांव खेल सकता है ऐसे में अक्षय प्रताप सिंह को इस सीट से चुनाव लडऩा होगा तो बीजेपी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। राज्यसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में वोट देकर राजा भैया इस समय सीएम योगी के खास बन गये हैं इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि सीएम योगी खुद ही राजा भैया के चचेरे भाई अक्षयत प्रताप सिंह (गोपाल जी) को बीजेपी का प्रत्याशी बनाने में मदद कर सकते हैं।
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वर्षों से चल रही है राजा भैया व राजकुमारी रत्ना सिंह के बीच राजनीतिक लड़ाई
राजा भैया व राजकुमारी रत्ना सिंह के बीच की राजनीतिक लड़ाई वर्षों से चल रही है। राजा भैया व राजकुमारी रत्ना सिंह दोनों ही राजघराने की है इसलिए जनता को उन्हें भरपूर समर्थन मिलता है। राजा भैया का परिवार भदरी घराने से आता है जबकि राजकुमारी रत्ना सिंह कलाकांकर राजघराने की है। एक बार राजा भैया के चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह ने राजकुमारी रत्ना सिंह को चुनाव हराया था तो राजकुमारी रत्ना सिंह भी अक्षय प्रताप को चुनाव हरा कर अपना बदला ले चुकी हैं।
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तो फिर राजा भैया को करना होगा अपना दल का समर्थन
लोकसभा चुनाव 2019 में प्रतापगढ़ की सीट अपना दल को ही मिलती है तो बीजेपी से लगाव के चलते क्षत्रिय बाहुबली राजा भैया को अपना दल के प्रत्याशी का समर्थन करना होगा। ऐसी स्थिति तब बन सकती है जबकि अक्षय प्रताप सिंह को टिकट न मिले। या फिर वह चुनाव लडऩे से इंकार कर दे। राजा भैया की बीजेपी से बढ़ती नजदीकी के चलते अक्षय प्रताप सिंह भी भगवा दल के टिकट से चुनाव लडऩा चाहेंगे। ऐसे में राजा भैया को ही टिकट दिलाने की सारी व्यवस्था करना होगी। बीजेपी ने राजा भैया के भाई को प्रत्याशी बनाया तो अपना दल को कही और की सीट देनी होगी। फिलहाल लोकसभा चुनाव २०१९ में राजा भैया व बीजेपी के रिश्तों की भी बड़ी परीक्षा होगी। अब देखना है कि इस चुनाव में कौन-कौन प्रत्याशी आमने-सामने होंगे।
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