बाबा के श्रृंगार के बाद पद्मविभूषण गिरिजा देवी के प्रशिष्य रोहित-राहुल मिश्र के शिष्यों द्वारा बाबा के कजरी और बाबा के भजन गाए गए। आराधना मिश्रा, पूजा राय अथर्व मिश्र, तरुण सिंह, सत्यम पटेल, सूरज प्रसाद कलाकारों ने 'झूला धीरे से झुलाऊं महादेव’, 'गंगा किनारे पढ़ा हिंडोल, डमरूवाले औघड़दानी’, 'झिर झिर बरसे सावन रस बूंदिया’, 'कहनवा मानो ओ गौरा रानी’, 'जय जय हे शिव परम पराक्रम’, 'तुम बिन शंकर' आदि रचनाएं बाबा के चरणों में अर्पित कीं।