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बनारस आज भी लालू से अपने होनहार आईएएस बेटे की मौत का जवाब मांगता है 

बनारस आज भी लालू से अपने होनहार आईएएस बेटे की मौत का जवाब मांगता है 
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Awesh Tiwary

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Updated: 9 Jul 2017, 4:00 PM IST

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पत्रिका एक्सक्लूसिव

आवेश तिवारी
वाराणसी। गलियों में बसे बनारस के पक्के मोहाल में डॉ अभिनव श्रीवास्तव की आँखें अब भी अपने दोस्त गौतम गोस्वामी को याद कर छलक पड़ती है। कंपकंपाते होठों से वो कहते हैं अनुराधा का हाल ठीक नहीं होगा बहुत जल्दी उस पर इतनी सारी जिम्मेदारी आ गई। मूल रूप से डेहरी आनसोन बिहार के रहने वाले और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से मेडिसिन में स्नातक फिर परास्नातक गौतम गोस्वामी ने जब सिविल सर्विसेज में जाने का फैसला किया तो सभी जानते थे कि चिकित्सा विज्ञान की कक्षाओं में हमेशा टॉप रहने वाला गौतम वहां भी बाजी मारेगा। हुआ यही, 1991 की सिविल सेवा परीक्षाओं में गौतम गोस्वामी ने सातवाँ स्थान प्राप्त किया ,उस रात बीएचयू कैम्पस में शानदार जश्न मना था। उस दिन लेकिन किसी को नहीं पता था कि जल्द ही कैम्पस का यह हीरा मगध के आसमान पर तारा बनकर चमकेगा ,तारा चमका लेकिन सियासत ने ऐसा कलंक का टीका लगाया कि गौतम पहले जेल पहुँच गए और फिर कैंसर ने उन्हें मार डाला। अपनी युवावस्था के आठ साल बनारस में बिताने वाले गौतम गोस्वामी की चर्चाएँ लालू प्रसाद यादव के अलग अलग ठिकानों पर पड़ी छापेमारी के बाद फिर से शुरू हो गई है।
होनहार आईएएस पर लग गए घोटाले के आरोप

टाइम मैगजीन द्वारा वर्ष 2004 में यंग एशियन एचीवर एवार्ड से सम्मानित गौतम गोस्वामी की शख्शियत का अंदाजा उस घटना से लगाया जा सकता है जब वर्ष 2004 में गोस्वामी पटना में तैनात थे और केन्द्रीय गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी अपना चुनावी भाषण दे रहे थे। उस दौरान अचानक गौतम ने आडवाणी के माइक के आगे हाथ रख कर कहा "सर ,आपका टाइम पूरा हो गया'। दरअसल चुनाव आयोग के द्वारा यह साफ़ दिशा निर्देश था कि रात 10 बजे के बाद ध्वनि विस्तारक यन्त्र का प्रयोग वर्जित है। टाइम मैगजीन ने गौतम गोस्वामी के बारे में लिखा था कि उनके द्वारा जिस तरह की प्रतिबद्धता के साथ नियम कानूनों के प्रति प्रतिबद्धता रखी गई है उससे जनता के मन में नौकरशाही के भ्रष्ट और अयोग्य होने की धारणा ख़त्म हुई है। लेकिन अफ़सोस इस सम्मान के महज एक साल के बाद ही गौतम गोस्वामी पर बाढ़ राहत में 18 करोड़ रुपयों के घोटाले के आरोप लगा दिए गए और उन पर एक लाख का इनाम घोषित कर दिया गया। अंततः गौतम को जेल हो गई और वो निलंबित कर दिए गए ,महत्वपूर्ण है कि बाढ़ राहत से जुड़े कार्यों के लिए ही टाइम ने उन्हें सम्मानित किया था।

साधु की करतूतों ने दिलाई गोस्वामी को सजा

डा.गोस्वामी को जिस घोटाले में सजा मिली उसमे मुख्य अभियुक्त संतोष झा नाम का व्यक्ति था जो कि लालू प्रसाद यादव के साले साधु यादव का नजदीकी था । जांच में यह साबित हो गया कि राहत सामग्री में घोटाला करने वाले संतोष झा ने साधू यादव के खाते में छह लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। साधु यादव ने तब कहा था कि यह राशि कार की कीमत है जो संतोष झा के पिता को बेची गई। निगरानी विभाग ने बाद में जांच में पाया कि कार एक लाख रुपए में दिल्ली के संतोष जेना से खरीदी गई थी और एक साल बाद उसे छह लाख में बेचा दिखाया गया। गौतम गोस्वामी को सजा तो मिली लेकिन यह साबित अंत तक नहीं किया जा सका कि उन्हें इस मामले में क्या लाभ मिला। इस घोटाले में साधु यादव ने 5 दिसंबर, 2006 को कोर्ट में सरेंडर किया था और उन्हें महज एक माह में 5 जनवरी, 2007 को जमानत मिल। लेकिन भारतीय प्रशासनिक सेवा के गौतम गोस्वामी को एक जेल में एक साल की सजा काटनी पड़ी।

तबियत ठीक होती तो अपने बीएचयू आते गौतम
गौतम गोस्वामी जब जेल से छूटे उनकी तबियत बिगड़ चुकी थी । खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर उनका निलम्बन निरस्त कर दिया गया लेकिन मरते दम तक गौतम अवसाद, अपमान की आग से उबर न पाए । बीएचयू से मेडिकल शिक्षा में गोल्ड मेडल हासिल करने वाले गौतम 2008 में पूर्व छात्रों के सम्मलेन में बनारस आने वाले थे लेकिन तबियत ने उनका साथ नहीं दिया ,उनके मित्र बताते हैं कि उन्होंने अपना सन्देश रिकार्ड करके भेजा था जिसमे वो लगभग रो पड़े । 6 जनवरी 2009 को पैंक्रियाटिक कैंसर से जूझते हुए गौतम गोस्वामी की मौत हो गई । बनारस में उनके साथी कहते हैं कि चाँद पर दाग हो सकता है लेकिन हमारे गौतम पर नहीं ,उनके साथ केवल अन्याय हुआ है लालू जी को उसका जवाब देना चाहिए । भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रत्यय अमृत कहते हैं कि गौतम की मौत एक बेहतर दोस्त और लाजवाब आईएएस की मौत थी ।