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EXCLUSIVE-राजा बड़हर की जमीन के लिए हुआ था नरसंहार, सोसाइटी के सदस्य ने बतायी पूरी कहानी

1952 में 1300 बीघा थी पूरी जमीन, सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 1955 का है प्रकरण
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Sonbhadra land dispute Massacre

Sonbhadra land dispute Massacre

वाराणसी. सोनभद्र के उम्भा गांव में हएु नरसंहार ने प्रदेश की सियासत में तूफान लाया हुआ है। प्रियंका गांधी के धरने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इस प्रकरण पर अपना बयान दिया था। पत्रिका से खास बातचीत में आदर्श सोसायटी के बुजुर्ग सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद कुमार ने जमीन से जुड़ी सारी जानकारी साझा की।
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वाराणसी निवासी आनंद कुमार ने बताया कि सोनभद्र के राजा बडहर की कुल 1300 बीघा जमीन थी। 1950 में बिहार के महेश्वर प्रसाद व यूपी के छह लोगों ने इस जमीन को पट्टे पर लिया था। यूपी व बिहार के 12 सदस्यों को यह जमीन पट्टे में बांटी गयी थी। किसी सदस्य को 100 तो किसी को 115 बीघा मिला था। 1952 में सारी जमीन आदर्श कोऑपरेटिव सोसाइटी के नाम थी। यह एक रजिस्टर्ड सोसाइटी थी इसलिए पट्टे पर ली गयी जमीन को बेचना संभव नहीं था। 1980 में महेश्वर प्रसाद सिन्हा की पत्नी पार्वती देवी का निधन हो गया था। इसके बाद माहेश्वर प्रसाद के हिस्से की जमीन उनकी बेटी आशा व नातिनी विनिता शर्मा को मिल गयी थी। बेटी व नातिनी दोनों के ही पति आईएएस है। बेटी व नातिनी के जमीन के हिस्से की देखरेख की जिम्मेदारी प्रधान यज्ञदत को मिली थी और वह प्रतिवर्ष खेती से होने वाली आय को परिवार के पास पहुंचाता था। लाखों में आय होने के चलते जमीन की काफी कीमती मानी जाती थी। वर्ष 2017 में विनिता शर्मा वाले हिस्से की जमीन प्रधान यज्ञदत ने खरीद ली थी। इसके बाद जमीन पर कब्जा करने के लिए प्रधान अपने साथियों के साथ पहुंचा था और वहां पर नरसंहार की घटना को अंजाम दिया है।
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पट्टे पर ली गयी जमीन कैसे बेची गयी
पट्टे पर ली गयी जमीन के नाम से ही सोसाइटी बनी थी। पट्टे पर जब जमीन ली गयी थी तो वहां पर जंगल था उसे काट कर जमीन को खेती लायक बनाया गया था। इसके बाद से जमीन सोसाइटी के अधीन थी। सूत्रों की माने तो जमीन को बेचना संभव नहीं था लेकिन कुछ लोगों ने खतौनी में नाम चढ़वा दिया था जिसके चलते वह जमीन बिक गयी।
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