रिजल्ट घोटाला: इज्जत बचाने को यूपी बोर्ड ने एक लाख अनुपस्थित छात्रों को भी कर दिया पास

रिजल्ट घोटाला: इज्जत बचाने को यूपी बोर्ड ने एक लाख अनुपस्थित छात्रों को भी कर दिया पास

Devesh Singh | Publish: May, 04 2018 03:21:06 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

रिजल्ट जारी होने के बाद से सवालों के घेरे में बोर्ड परीक्षाफल, लोगों के आक्रोश को खत्म करने के लिए फेल छात्रों को भी किया गया पास

वाराणसी. यूपी बोर्ड रिजल्ट घोटाले में रोज-रोज नये तथ्य सामने आने लगे हैं। यूपी बोर्ड ने नकल रोकने के लिए सभी परीक्षा केन्द्रों पर सीसीटीवी लगाया था जिसके चलते बोर्ड ने ही दावा किया था कि 11.29 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षाफल छोड़ दिया है। बीजेपी के मंत्रियों ने इसे सरकार की उपलब्धि बतायी थी। परीक्षाफल घोषित होने से पहले व बाद में परीक्षा छोडऩे वालों की संख्या में एक लाख का अंतर आ गया है सवाल उठने लगा है कि आखिरकार बिना परीक्ष दिये ही इन छात्रों को पास कर दिया गया है या फिर सरकार को खुश करने के लिए आंकड़ों की बाजीगिरी में ही खुद बोर्ड के लोग ही फंस गये हैं।
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यूपी बोर्ड ने परीक्ष खत्म होने के बाद बताया था कि 11.29 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी है। परीक्षाफल छोडऩे वालों में दूसरे प्रांत से पंजीकरण कराये गये छात्रों की सबसे अधिक संख्या बतायी गयी थी। इसके बाद बोर्ड ने जब परीक्षाफल घोषित किया तो परीक्षा छोडऩे वालों की संख्या 10.6 लाख कुछ हजार बतायी गयी है। ऐसे में सवाल खड़ा हुआ कि एक लाख से अधिक छात्र कहां गये। इन छात्रों के परीक्षा छोडऩे का दावा किया गया था लेकिन अब इन छात्रों का पता नहीं चल रहा है। या तो यह छात्र पास कर दिये गये हैं या फिर इन छात्रों की संख्या ही गलत बतायी गयी है। बोर्ड परीक्षाफल को लेकर दिनोंदिन सवाल गहराता जा रहा है। बोर्ड परीक्षाफल का अधिक प्रतिशत होने से छात्रों को नुकसान नहीं हुआ है इसलिए परीक्षाफल को लेकर आम लोगों ने भी चुप्पी साधी हुई है।
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पत्रिका ने सबसे पहले बताया था कि किस तरह से ओएमआर शीट में कुछ और अंक पत्र में कुछ नम्बर देकर छात्रों को पास किया गया है। परीक्षाफल घोषित होने के समय 20 से 25 प्रतिशत परीक्षाफल होने की संभावना जतायी गयी थी लेकिन जब परीक्षाफल जारी हुआ तो यह प्रतिशत 70 से उपर जा पहुंचा था। बोर्ड परीक्षाफल का प्रतिशत परीक्षकों के समझ से भी बाहर था। परीक्षक खुद कहते थे कि कापी जांचते समय अधिकांश छात्र फेल थे इसलिए इतना अधिक प्रतिशत होने का सवाल ही नहीं होता है। फिलहाल बोर्ड के अधिकारियों ने परीक्षाफल में किसी प्रकार की त्रृटि से इंकार किया है लेकिन सभी सवालों का जबाव देने से बच भी रहे हैं।
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