
World Diabetes Day
वाराणसी. भारत में सबसे तेजी से डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की माने तो पूरी दुनिया में भारत डायबिटीज (मधुमेह) की राजधानी बन चुका है। वर्ष 2019 में मधुमेह के आठ करोड़ मरीज थे और जिन लोगों ने कभी बीमारी की जांच नहीं करायी है यदि उनकी संख्या को जोड़ दिया जाये तो यह 11 करोड़ पहुंच सकती है। 14 नवम्बर को बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है। इस बार की थीम दे फेमिली एंड डायबिटीज (परिवार एंव मधुमेह) रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करने वाला है।
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तनाव भरी जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, खानपान में लापरवाही व शारीरिक व्यायाम से दूर रहना ही बीमारी का मुख्य कारण है। अभी तक एक निश्चित आयु पूरी कर चुके लोगों में इस बीमारी का लक्षण मिलता था लेकिन अब तेजी से युवा भी इस बीमारी का शिकार होने लगे हैं। बच्चों में भी इस बीमारी का मिलना भविष्य के लिए बहुत बड़े खतरे का संकेत हैं। सीएमओ डा.वीबी सिंह ने बताया कि इस बार की थीम से स्पष्ट हो जाता है कि परिवार में मधुमेह से होने वाले प्रभाव के बारे में जागरूक करना है। विश्व मधुमेह दिवस पर लोगों को जागरूक करने के लिए रैली निकाली जायेगी। साथ ही नि:शुल्क जांच व परार्मश शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया जायेगा। गैर संचारी रोग के नोडल अधिकारी एसीएमओ डा.पीपी गुप्ता ने बताया कि मधुमेह का मुख्य कारण अस्वस्थ जीवनशैली व दिनचर्या, सामान्य से अधिक वजन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, जीन एंव पारिवारिक इतिहास है। यदि प्रतिदिन 45 मिनट का उचित व्यायाम व संतुलित और स्वस्थ्य आहार का करने से बीमारी पर नियंत्रण रखा जा सकता है। दीनदयाल राजकीय अस्पताल के एनसीडी क्लीनिक के डा.क्षितिज तिवारी की देखरेख में ओपीडी के समय मधुमेह पीडि़तों की नि:शुल्क जांच, परार्मश व दवाओं का वितरण किया जायेगा। साथ ही जिले के आठ ब्लाक के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भी यह सुविधा नि:शुल्क मिलेगी।
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मधुमेह की शुरूआती लक्षण
बार-बार भूख लगना, तेजी से वजन कम होना, थकावट महसूस होनी, मिचली और उल्टी की समस्या, मूत्राशय, त्वचा और योनि क्षेत्र में बार-बार संक्रमण होता है तो मधुमेह की जांच अवश्य करनी चाहिए।
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इतने प्रकार के होते हैं मधुमेह
टाइप वन डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन नहीं बनता है। इसे पीडि़त मरीजों की संख्या दस प्रतिशत है जबकि टाइप टू डायबिटीज में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बनता है इससे पीडि़तों की संख्या 90 प्रतिशत है। गैस्टेशनल मधुमेह का तीसर प्रकार होता है यह बीमारी गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होता है।
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Published on:
13 Nov 2019 06:36 pm
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