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राज्यपाल ने कहा मेरे पास आया था माल्या, दफ्तर से मैंने उसे खाली हाथ लौटाया
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राज्यपाल ने कहा मेरे पास आया था माल्या, दफ्तर से मैंने उसे खाली हाथ लौटाया

सीएसए के 20वें दिक्षान्त समारोह में शिरकत करने पहुंचे राज्यपाल रामनाईक, छात्रों को मेडल देकर माल्या की कहानी बुताई
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कानपुर

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Vinod Nigam

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Updated: 28 Sep 2018, 10:14 PM IST

कानपुर। देश में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और हमारे पास पेट्रेलियम मंत्रायल था। शराब कारोबारी विजय माल्या ने मिलने का समय मांगा। हमने भी उससे मिलने की रजामंदी दे दी। वो दफ्तर आया और शीरे से इथेनॉल बनाने पर रोक लगाने के लिए हमसे कहा। लेकिन हमने उसकी बात नहीं मानी और बैरंग वापस कर दिया था। इसके वाद वो अटल जी से मिला पर उन्होंनों भी उसकी बात नहीं सुनी। यही वजह रही कि किसानों के गन्ने की बिक्री कम नहीं हुई और यूपी के साथ अन्य प्रदेशों के किसान बढ़ी संख्या में गन्ने को अपने खेतों में उगाते हैं। यह बात चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 20 वें दीक्षांत समारोह में शिरकत करने के लिए आए राज्यपाल राम नाईक ने कही। इस मौके पर उन्होंने छात्र-छात्राओं को डिग्रियां और मैडल दिए और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

गन्ने से इथेनॉल की करवाई थी शुरूआत
यूपी के राज्यपाल सीएसए के 20वी दीक्षान्त समारोह में भाग लेने के लिए कानपुर पहुंचे। यहां उन्होंने छात्र-छात्रों को मैडल देकर किसानों के उत्थान के लिए आगे आने का आवह्न किया। राज्यपाल ने एक किस्से का जिक्र करते हुए बताया कि शीरे से इथेनॉल बनने से गन्ना किसानों को लाभ हुआ। इसकी शुरुआत तब हुई, जब मैं पेट्रोलियम मंत्री था। तब शराब कारोबारी विजय माल्य अन्य कारोबारियों के साथ मुझसे मिलने के लिए आया था। विजय माल्या ने हमसे गन्ने के शीरे से इथेनॉल बनाने पर रोक लगाने की मांग की। पर हमने उसे दफ्तर से चले जाने का आदेश दिया। वो गुस्से से लाल हो गया और अटल जी के पास लाव-लश्कर के साथ पहुंच गया। लेकिन अटल जी भी किसानों के साथ थे और उन्होंने माल्या के अरमानों पर पानी फेर फैसला नहीं बदले की बात कह उसे चले जाने को कहा था। राज्यपाल ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा गन्ना उप्र में पैदा होता है। यहां की जमीन महाराष्ट्र से ज्यादा उर्वरा है। इसके बावजूद यहां उतना विकास नहीं हुआ। पर अब कुछ हालात बदले हैं और इसका फाएदा किसानों को जरूर होगा।

इसलिए मैं नहीं बन सका किसान
कुलाधिपति ने छात्रों से कहा कि इस विकास को आप जैसे युवा गति दे सकते हैं। मेरे पास तो जमीन नहीं थी, इसलिए इस क्षेत्र में नहीं आ सका। आप तकनीक का इस्तेमाल करें। कृषि क्षेत्र में सच में गुणात्मक विकास हुआ है। 1952 में देश की नौबत अमेरिका से गेहूं आयात करने की आ गई थी, जबकि आज हम निर्यात करने की स्थिति में हैं। राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को सलाह दी कि असफलता से हताश न हों, बल्कि आत्मचिंतन करें।पीलीभीत के रहने वाले अजमुल हसन ने बीएससी (ऑनर्स) कृषि में सर्वोच्च अंक लाकर दीक्षांत में सबसे अधिक पांच मेडल प्राप्त किया। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि अजमुल के पिता रियाजुल हसन किसान हैं और वो अपने बेटे को कृषि वैज्ञनिक बना कर किसानों को आने वाली समस्याओं को दूर करना चाहते हैं। देश को आज अजमुल हसन जैसे सैकड़ों युवाओं की आवश्यकता है। डॉक्टर, मास्टर और कलेक्टर तो बहुत युवा बन जाते हैं पर किसानों को विकास के पथ पर ले जाने वालों की संख्या बहुत कम है। इसलिए आपलोग मन लगाकर पढ़ें और कृषि वैज्ञानिक बनकर किसानों की सेवा करें।