
कानपुर. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित हाई स्कूल और इण्टरमीडियेट की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। इस बार योगी सरकार ने सौ फीसदी नकल विहीन परीक्षा कराने के लिये कमर कस ली है। सन् 1998 में बनाया गया उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन निवारण कानून झाड़ पोंछ कर बाहर निकाला गया है। नकल कराने वालों को जेल भेजने की तैयारी के साथ परीक्षा केन्द्रों पर मजिस्ट्रेट तैनात किये गये हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक, कानपुर मण्डल केके गुप्ता ने पत्रिका के साथ खास बातचीत के दौरान बताया कि पूरे मंडल में नकल रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। शासन की मंशानुसार आज पहली पारी की परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से निपट गई। नकल करने और कराने वालों पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा और इस धारा के तहत उन्हें तीन माह की सजा का प्रावधान है।
6 जिलों में कुल 543 परीक्षा केन्द्र-
सम्पूर्ण कानपुर मण्डल के सभी छह जिलों में नकल और गड़बड़ी विहीन परीक्षा कराने के इन्तजाम किये गये हैं। कानपुर मण्डल के सभी छह जिलो में कुल 543 परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं। इनमें से 37 प्रतिशत संवेदनशील तथा अतिसंवेदनशील हैं। इस कटेगरी में वे परीक्षा केन्द्र रखे जाते हैं, जहॉ पिछले वर्षों में कोई न कोई गड़बड़ी पायी गयी थी। इनमें 37 जोनल मजिस्ट्रेट और 100 सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किये गये हैं। इसके अलावा औचक छापों के लिये 37 सचल दस्ते भी बनाये गये हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक, कानपुर मण्डल केके गुप्ता ने बताया कि नकल शिक्षा के लिए खतरनाक रोग की तरह है और इससे होनहार छात्रों का भविष्य खराब कर रहा था। सरकार के आदेशानुसार शिक्षा विभाग ने किसी भी कीमत पर नकल नहीं कराए जाने का प्रण लिया है और हम इसमें कामयाब भी होंगे।
वित्त विहीन विद्यालय शिक्षा विभाग के रडार पर-
केके गुप्ता ने बताया कि वित्त विहीन विद्यालय शिक्षा विभाग के रडार पर रहेगें। ये ऐसे विद्यालय होते हैं, जिन्हें कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलता है और ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि सेल्फ फाइनेंस वाले कालेज सामूहिक नकल का गढ़ होते हैं, जहॉ पैंसों के लिये छात्रों को नकल करायी जाती है। इन परीक्षा केंद्रों पर द्रोण के अलावा एसटीएफ को भी लगाया गया है। अगर परीक्षा केंद्रों पर नकल पकड़ी कई तो उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। केके गुप्ता ने बताया कि शिक्षा विभाग के अलावा जिला प्रशासन और पुलिस बल बोर्ड परीक्षा शंतिपूर्ण ढंग से कराए जाने के लिए लगा हुआ है। सारे केंद्रों की निकरानी के लिए एक रूम बनाया गया है, जहां विभाग के अफसर हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।
नकल कराने वाले जाएंगे जेल-
केके गुप्ता ने बताया, पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं पर कोडिंग की व्यवस्था की गयी है मतलब नकल माफिया केन्द्र व्यवस्थापक से सॉठगॉठ करके कापी नहीं बदल सकेगें। चूॅकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि इस बार उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन निवारण अधिनियम 1998 सख्ती से अमल में लाया जायगा, इसलिए परीक्षा केन्द्रों के व्यवस्थापकों में खौफ है। इसमें अब छात्र तो जेल नहीं जाएंगे, लेकिन उन्हें साधन मुहैया कराने वाले को तीन माह से एक साल तक की जेल हो सकती है।