
कोटा. नैनवा. इसे गांव का पशुप्रेम ( Animal love ) कहिएगा, या आमजन के लिए गौ संरक्षण ( Cow protection ) का संदेश। या यूं कह दीजिए कि इक्कीसवी सदी में पहुंचने के बाद भी ग्रामवासियों का अपनी संस्कृति ( culture ) से गहरा जुड़ाव है। जहां पाई पाई के लिए लोग एक दूसरे के दुश्मन बनने से नहीं चूक रहे, वहीं नैनवां उपखण्ड के खेरुणा गांव के वासियों ने जिस अदब व कायदे से एक सांड का अंतिम संस्कार ( Bull funeral ) करने की तैयारियां कर पशुओं के प्रति प्रेम की गजब मिसाल पेश की है। ( ajab gajab )
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ग्रामीणों ने न सिर्फ सांड का अंतिम संस्कार किया, ( funeral of bull From Hindu ritual custom ) बल्कि इससे पहले वह सभी रस्में निभाई जो एक इंसानी मौत के मौके पर निभाई जाती है। लोगों ने सांड के शव का पंचामृत से स्नान करवाया फिर पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार ( Vedic mantra ) के साथ पूजा-अर्चना की। ( Worship ) पंचों की ओर से कफन ओढ़ाया गया। साथ ही प्रत्येक घर के सदस्यों ने कपड़े ओढ़ाए। सांड की मौत से 250 परिवार का गांव में हर कोई मायूस था लेकिन अंतिम विदाई धूमधाम से की। ( Funeral procession )
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कुएं में गिरने से हुई सांड की मौत
खेरुणा गांव के बीचो-बीच सार्वजनिक कुआं है। पहले पानी के लिए लोग इसका उपयोग किया करते थे लेकिन वर्तमान में पूरे गांव में हैण्डपम्प और नलकूप लगे होने से लोग अब इसका उपयोग नहीं करते। रविवार रात सांड इस 100 फीट गहरे कुएं में गिर गया। इससे उसकी मौत हो गई। सोमवार सुबह लोगों को कुएं में सांड के गिरने की सूचना मिली तो पूरा गांव कुएं के आसपास जमा हो गया। दो युवक रस्सी के सहारे कुएं में उतरे और सांड के पैरों में रस्सी बांध ट्रैक्टर की मदद से खींच कर बाहर निकाला। इस दौरान ग्रामीणों ने सांड को कहीं खरोच न आए इसका भी पूरा ख्याल रखा।

पंचामृत से करवाया स्नान
कुएं से बाहर निकालने के बाद गांव में पंचायत बैठी और सांड का अंतिम संस्कार धूमधाम करने का निर्णय लिया। इसके बाद पंचामृत से सांड का स्नान करवाया। मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की।
ट्रॉलीभर कपड़े ओढ़ाए
अंतिम संस्कार के दौरान पंचों की ओर से सांड को कफन ओढ़ाया गया। इसके बाद 250 परिवार की आबादी वाले खेरूणा गांव के प्रत्येक सदस्य ने एक जोड़ी कपड़े व दो-दो नारियल चढ़ाए। फिर, विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाई गई। गांववासियों का यह प्रेम देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे कितने पशु प्रेमी है।
डीजे पर लोकगीतों के साथ निकाली शोभायात्रा
अंतिम संस्कार की सभी रस्मे निभाने के बाद सांड के शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर पूरे गांव में डीजे पर लोकगीतों के साथ शव यात्रा शोभायात्रा के रूप में निकाली। गांव में विभिन्न समाज के लोग रहते हैं। अक्सर यहां आपसी वाद-विवाद के कारण लोग अलग-थलग रहते हैं। लेकिन, यह पहला मौका था जब पूरे गांव के लोग एकजुट होकर अंतिम संस्कार में शामिल हुए। शोभायात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा। महिलाएं तेजाजी के गीतों पर नाचते गाते चल रही थी। शोभायात्रा प्रमुख मार्गों से होती हुई तेजाजी थानक पर पहुंची। वहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शव को दफनाया गया।
बारहवें के दिन होगा विशाल भंडारा
गांव की पंचायत ने बारहवे के दिन विशाल भंडारा आयोजन का निर्णय लिया है। साथ ही अंतिम संस्कार स्थल पर भव्य स्मारक का निर्माण करवाया जाएगा। जिसमें पूरा गांव सहयोग करेगा।
