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BIG News: कोटा में भारत के लाखों स्टूडेंट्स की जान खतरे में, पैसा बनाने के लिए जिंदगी तबाह करने पर तुले अफसर
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BIG News: कोटा में भारत के लाखों स्टूडेंट्स की जान खतरे में, पैसा बनाने के लिए जिंदगी तबाह करने पर तुले अफसर

कोटा नगर निगम ने शहर में कोचिंग हॉस्टल, स्कूल, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग और मैरिज गार्डन की जांच किए बिना ही फायर एनओसी जारी कर दी। जबकि इन संस्थाओं में फायर सेफ्टी उपकरण तक नहीं है। आग की घटना हो जाए तो भगवान ही मालि‍क है।
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कोटा

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Zuber Khan

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May 28, 2019

कोटा. नगर निगम ( Nagar Nigam Kota ) के अग्निशमन अनुभाग के अधिकारियों ने हॉस्टलों, स्कूलों, कोचिंग संस्थानों व मल्टीस्टोरी बिल्डिंगों ( coaching hostel , multistory building , School ) की जांच किए बिना ही दफ्तरों में बैठ कर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) ( Fire NOC ) जारी कर दिया। जबकि नियमों के तहत जीरो सेटबैक पर बने भवनों को एनओसी जारी नहीं की जा सकती। निगम के पिछले दो दिन में किए गए निरीक्षण में यह बात सामने आई है। इसकी शिकायत भी उपायुक्त व आयुक्त को की गई है। अब निगम अपने स्तर पर ऐसी एनओसी की जांच करवा रहा है। कब और किसके कार्यकाल में यह एनओसी जारी की गई थी।

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सूत्रों ने बताया कि लोकसभा की आचार संहिता के ऐनवक्त पहले मुख्य अग्निमशन अधिकारी संजय शर्मा और अग्निशनम अधिकारी राकेश व्यास का तबादला कोटा से हो गया था। एक पखवाड़े से अधिक समय तक कोटा में दोनों महत्वपूर्ण पद खाली थे। इस दौरान केवल निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर एक दर्जन व्यावसायिक, शैक्षणिक तथा हॉस्टलों को एनओसी जारी कर दी गई, जबकि नियमों के तहत अग्निशमन अधिकारी से नीचे का अफसर एनओसी जारी नहीं कर सकता।

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लीडिंग फायर मैन की ओर से निर्मला गल्र्स स्कूल स्टेशन क्षेत्र, बोरखेड़ा क्षेत्र के दस्तूर मैरिज गार्डन, अलबयान सैकण्डरी स्कूल समेत करीब एक दर्जन संस्थानों की एनओसी जारी करने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। निगम की जांच के दौरान सामने आया कि ज्यादातर हॉस्टलों ने फायर की एनओसी ही नहीं ले रखी, जबकि अग्निशमन की मौका निरीक्षण रिपोर्ट में सब कुछ ठीक होना बताया गया है। फायर सिस्टम लगे हुए बताए गए हैं। जांच के दौरान अग्निशमन के उपकरण तक नहीं मिले हैं। ज्यादातर स्कूल और छोटे कोचिंग संस्थान भी बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं।

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शॉपिंग मॉल की एनओसी निरस्त
तत्कालीन अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने एरोड्राम सर्किल स्थित एक शॉपिंग मॉल की जांच की थी। इसमें नियमों के विपरीत फायर एनओसी पाई गई थी, जिसे निरस्त कर दिया गया था। इसमें सेटबैक की जगह दुकान खोल ली थी और उपकरण भी चालू नहीं मिले थे।


उठे थे सवाल
अग्निशमन समिति के अध्यक्ष अतुल कौशल ने ही दो साल पहले कार्य समिति की बैठक में तत्कालीन मुख्य अग्निमशन अधिकारी द्वारा बिना जांच के एनओसी देने का मामला उठाया था। इसके बाद जांच की तो फायर के कोई उपकरण तक नहीं मिले थे। जांच में भी गलत तरीके से एनओसी जारी करना पाया गया था।

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नोटिस देने का खेल
नगर निगम के प्रतिपक्ष नेता अनिल सुवालका ने कहा कि भाजपा बोर्ड में फायर एनओसी देने में खेल हुआ है। फायर अनुभाग के अधिकारी पहले एनओसी नहीं लेने पर नोटिस देते हैं, फिर कार्रवाई नहीं करते। इसमें लेन-देन का खेल चल रहा है, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। इस मामले में मंगलवार को आयुक्त से मिलेंगे। उधर न्यास के पूर्व ट्रस्टी महेन्द्र शर्मा ने शिकायत की है कि 10 से 31 मार्च तक जो एनओसी जारी की गई है, उनकी जांच होनी चाहिए। गलत एनओसी जारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

गलत एनओसी जारी करने की शिकायत आई है। इस बारे में पता करवा रहे हैं। अग्निमशन उपकरणों की जांच की जा रही है। जो एनओसी नहीं ले रहे हैं, नियमों के तहत संचालित नहीं हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
कीर्ति राठौड़, उपायुक्त, निगम