
कोटा. चम्बल के पानी ने कई लोगों के सपने बिखेर दिए। अब इन लोगों के सामने सवाल है कि कैसे अब अपने बिखरे आशियाने को सजाएंगे। सैकड़ों परिवार चम्बल में आई बाढ़ के साथ ही चिंताओं में डूब गए और बेघर हो गए। कोटा बैराज के तीन दिन से खुले गेटों के कारण आई बाढ़ के कारण कई लोगों की घर-गृहस्थी पानी में डूब गई, लोग बेघर हो गए और सड़कों पर आ गए।
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हनुमानगढ़ी निवासी पूजा, दीपक और उनके भाई-बहनों ने बताया कि उनकी किताबें और बैग भी बह गया। अब कैसे स्कूल जाएंगे और पढ़ेंगे। कारीगरी का काम करने वाले हरिशंकर ने बताया कि बेटी निशा बीमार थी। अस्पताल से करीब 15 दिन बाद जैसे ही घर पहुंचे तो चम्बल में सैलाब आ गया। जो हाथ लगा, वही सामान बचा लिया। बाकी सब-कुछ बह गया। बूंदी सिलिका के पीछे रहने वाले दयाराम मेघवाल ने बताया कि चम्बल के उफान पर उन्हें बेघर कर दिया। उनके बड़े से घर में 14 कमरे थे। ऑटो, कार, तीन बाइक, बड़ा बक्सा व दो भैंसे थी। चम्बल में आए उफान में मकान डूब गया। छह हजार रुपए देकर बड़ी क्रेन से इन सामानों को जैसे-तैसे निकाला और परिचित के यहां रखवाया। घर अब भी डूबा है। इसके चलते वे वहां जा नहीं पा रहे है।
दीवार फांदकर बचाई जान
बूंदी सिलिका निवासी दिव्यांग विनोद मेघवाल ने बताया कि चम्बल का तेज बहाव ऐसा घरों में घुसा कि दीवार फांदकर जान बचानी पड़ी। इस अफरा-तफरी में छोटे भाई की शादी के सारे जेवर भी घर के साथ पानी में डूब गए। खाने-पीने का घरेलु सामान भी नहीं बचा। कुछ दिनों पहले ही मकान बनाया था। उसका प्लास्टर तक नहीं करवा पाया। बिजली की फिटिंग तक नहीं हो पाई। जैसे-तैसे परिवार का पेट पाल रहा था। जिंदगी कब पटरी पर लौटेगी, भगवान जाने।
पिताजी की पेंशन के पैसों से बनाया था घर
नंदा की बाड़ी निवासी बाढ़ पीडित रामेश्वर नेे बताया कि पिताजी ने पेंशन के पैसे से घर बनाया था। जब वो नहीं रहे तो लोग घर की कीमत लगाने लगे। 15 लाख रुपए तक मिल रहे थे, लेकिन हमने उनकी निशानी समझ इसे बेचने से इनकार कर दिया, लेकिन आज बड़े जतन से सहेजा घरोंदा पानी-पानी हो चुका है। डेढ़ मंजिल डूबी है और पानी उतरा भी तो दीवारों के चटखने और टूटने का डर बना रहेगा। इस बार तो लग रहा है चम्बल मइया ने जितना दिया था, उससे ज्यादा छीन लिया।
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चार दन होग्या, म्हांकी बस्ती मं प्रलय ही आग्गी
कोटा. नंदा की बाड़ी में रहने वाली 58 वर्षीय द्वारकी बाई ने बताया कि गणेशजी न बूहाया जनाड़ा का दन सूं ही सरकारी स्कूल में पड्या छां, आज चार दन होग्या। म्हाकी बस्ती मं प्रलय ही आग्गी, नावां पटक-पटक र मनखड़ा न निकाल र्या छ:। घर मं रख्यो सामान खराब होग्यो। खाबा-पीबा की व्यवस्था सरकार कर री छ:। पण साब यो पाणी कदा उतरगो। म्हा क ताईं तो यो भी पतो कोई न मकान डूब ग्यो क गिर ग्यो।
सब कुछ बह गया
गांवड़ी निवासी लक्ष्मीबाई ने बताया कि घर में रखे फ्रीज, टीवी, पंखे, कपड़े सब मकान की छत पर रखे थे। अब तो मकान भी डूब गया बताया। मकान की छत पर रखा सामान बह गया होगा। घर में रखा सामान पानी से खराब हो गए। चार दिनों से गांवड़ी के सरकारी स्कूल में आश्रय ले रखा है।
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दूसरी जगह रह रहे हैं
गांवड़ी में सामान के साथ बैठी रत्ना वर्मा ने बताया कि वह किराए से रह रही थी। बाढ़ का पानी बढ़ा तो रेस्क्यू टीम ने रविवार को घर के सामान सहित बाहर निकाला। वह बोली कि आज तो होटल में किराए से कमरा लिया है, एक दो दिन में दूसरा किराए का दूसरा मकान ढूंढना पड़ेगा।
कर्जा लेकर बनाया था घर
हनुमानगढ़ी निवासी किशना सुमन ने बताया कि चम्बल किनारे सात साल पहले 2 लाख कर्जा लेकर घर खरीदा था। कोटा बैराज से छोड़े गया पानी सबकुछ बहा ले गया। किशना ने बताया कि बाढ़ से घर में रखा सब सामान बह गया। मकान पानी में डूबा है।