
विनीत सिंह @कोटा.
करोड़ों उम्मीदें परवाज भरती हैं उस आंगन में… बेताब रहता है मुल्क तरक्की की इबारतें लिखे जाने के लिए… खास-ओ-आम के ख्वाबों का हर सरमाया बंधा है उस दहलीज से… सवालों के तकल्लुफ में बांधी तकलीफों को जब तक मंजिल न मिले उन्हें लावारिस नहीं छोड़ सकते… इसीलिए हर नुमाइंदे को अपनी बात रखने और जनता के लिए सहूलियतें जुटाने का मौका मिले… यही तदबीर होगी मेरी… पूजा, इबादत या कोशिश इसे आप जो नाम देना चाहें दें… मैं अपने हिस्से का पूरा वक्त इसी में लगा दूंगा।
लोकसभा अध्यक्ष ( Lok Sabha Speaker Om Birla
) चुने जाने के बाद पहली बार कोटा आए ओम कृष्ण बिरला ( Om Birla
) से जब राजस्थान पत्रिका ( Rajasthan Patrika ) ने उनकी भावी योजनाओं के बारे में पूछा तो चंद लम्हों में मन की पूरी बात कह गए। चुने हुए शब्द और हर शब्द का व्यापक मायना रहा।
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सदन में संख्या बल को लेकर हताश विपक्ष को अनसुने किए जाने की आशंका पर लोकसभा अध्यक्ष ( Lok Sabha Speaker ) ने कहा कि देश की संसदीय प्रणाली ( Parliamentary system ) में सांसद को जनता चुनकर भेजती है, कोई राजनीतिक दल नहीं। इसलिए जनता को अपने सांसद से उम्मीद रहती है कि वे उनकी समस्याएं सदन में उठाएंगे। इसलिए पक्ष और विपक्ष के सभी सांसद समान हैं। सभी को अपनी बात करने का अधिकार है। उनके अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें अपनी बात कहने का मौका देना मेरी जिम्मेदारी है। सदन के नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Prime Minister Narendra Modi ) ने इसके लिए मुझे आश्वस्त किया है कि विपक्ष को अपनी बात कहने का पूरा मौका मिलेगा।
अनुशासन के सवाल पर बिरला ने कहा कि बीते एक दशक में कई मर्तबा ऐसे मौके आए जब सांसद अपनी बातें मनवाने के लिए वेल तक आ गए। कई बार तो कागजों के जहाज तक उड़ा दिए गए। इससे सदन की मर्यादा को तो ठेस पहुंची ही इसके साथ ही उन करोड़ों लोगों को अपनी उम्मीदें भी बिखरती दिखाई दीं जिन्होंने अपनी तरक्कीका ख्वाब लेकर सासंदों को चुना था। पहले ही सत्र की शुरुआत में सभी दलों के नेताओं और उनके प्रतिनिधियों के साथ वार्ता कर उन्हें ऐसी किसी भी स्थिति बचने के लिए तैयार कर रहे हैं, ताकि जनता जनार्दन का भारतीय लोकतंत्र पर भरोसा बढऩे के साथ ही लोकतंत्र के मंदिर के प्रति आस्था भी कायम रह सके। अनुशासनहीनता के लिए सदन में कोई जगह नहीं है, क्योंकि जनता की पाई-पाई लगने के बाद ही सदन की कार्रवाई चलती है और इससे जनता के मसले भी उलझते हैं।
कई अहम मौकों पर भी खलती सदन की खाली कुर्सियों के सवाल पर बिरला ने कहा कि वरिष्ठ सांसदों की मदद से नए सांसदों की समझाइश कराई जाएगी और उन्हें सदन की कार्रवाई की अहमियत समझा सभी सत्रों में ज्यादा से ज्यादा मौजूद रहने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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सांसदों को समझना होगा कि सदन में उनकी जितनी ज्यादा मौजूदगी रहेगी उतनी ही अपने क्षेत्र की उस जनता की समस्या का समाधान कर सकेंगे जिसने उन्हें चुनकर भेजा है। इतना ही नहीं सांसदों को ऐसे सवाल पूछने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा जिनका सरोकार जनता की उन जमीनी समस्याओं से हो जिनका समाधान किए बिना उनकी तरक्की की इबारत नहीं लिखी जा सकती। बिरला ने कहा कि मैं पूरी कोशिश करूंगा कि सभी सांसद सवाल सदन में अपने सवाल रख सकें और उन सभी के जवाब उन्हें तय समय पर मिल सकें।