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Lord Jagannath Rath Yatra: 200 साल पहले भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ किशोरपुरा से आए थे भगवान जगन्नाथ
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Lord Jagannath Rath Yatra: 200 साल पहले भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ किशोरपुरा से आए थे भगवान जगन्नाथ

kota news, kota hindi news, Lord Jagannath Rath Yatra: कोटा में स्थित मंदिरों की कहानियां किस्से भी जरा अलग से हैं। हर मंदिर से जुड़ी अपनी एक कहानी है। बात हो रही है जगदीश मंदिर की।
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कोटा

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Zuber Khan

•

Jul 04, 2019

कोटा. शहर में स्थित मंदिरों की कहानियां किस्से भी जरा अलग से हैं। हर मंदिर से जुड़ी अपनी एक कहानी है। बात हो रही है श्रीपुरा स्थित पारीक समाज के जगदीश मंदिर ( Lord Jagannath temple ) की। श्रीपारीक पंचायत कोटा के महामंत्री रासबिहारी पारीक बताते हैं कि पहले किशोरपुरा में भगवान जगदीश का मंदिर था। जो करीब 400 साल पुराना है, लेकिन परकोटा बना तो राज्य आदेश हुआ कि परकोटे के बाहर जो भी हैं अंदर आ जाएं। इस पर करीब 200 वर्ष पहले भगवान जगदीश बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमा को श्रीपुरा स्थित वर्तमान स्थान पर लाकर स्थापित कर दिया। उसके बाद मंदिर के लिए जमीन पारीक समाज ने खरीदी और मंदिर का निर्माण कर प्रतिमाएं स्थापित की गई।

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आज निकलेगी रथयात्रा ( Lord Jagannath Rath Yatra )
उन्होंने बताया कि 4 जुलाई को मंदिर में रथयात्रा महोत्सव ( Rath Yatra Festival ) मनाया जाएगा। इस मौके पर दोपहर 2.30 बजे से भजन कीर्तन होंगे। शाम को 5.30 बजे मंदिर से रथयात्रा शुरू होगी, जो सूरजपोल, कैथूनीपोल, लालबुर्ज, गंधीजी की पुल, श्रीपुरा, सुभाष सर्किल, श्रीपुरा होते हुए जगदीश मंदिर पहुंचेगी। आरती के साथ महोत्सव का समापन होगा।

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15 वर्षों से निकाल रहे
पारीक के मुताबिक पूर्व में रामपुरा स्थित जगदीश मंदिर से रथयात्रा निकाली जाती थी, वहां रथयात्रा निकलना बंद हुई तो प्रतीकात्मक रूप से पारीक समाज ने इस परंपरा को शुरू कर दिया। करीब 15 वर्षों से मंदिर से परिक्रमा निकाली जाती है।

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मंदिर में स्थापित प्रतिमा दुर्लभ है
मंदिर में स्थापित प्रतिमा भी दुर्लभ है। रासबिहारी बताते हैं कि भगवान जगदीश की प्रतिमा कुशा की बनी हुई है। प्रतिमा को किस तरह से तैयार किया होगा ईश्वर ही जानता है। उनकी नजर में इस तरह की प्रतिमा संभव है कि किसी भी मंदिर में नहीं है। प्रतिमा काफी खूबसूरत है।

 

मंदिर में भगवान जगदीश के अलावा बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमा भी स्थापित है। भगवान जगदीश और बलभद्र की प्रतिमा करीब ढाई फीट, सुभद्रा की प्रतिमा करीब 2 फीट की है। मंदिर दर्शनार्थियों के लिए सुबह 5.30 बजे मंगला आरती के साथ खुलता है। जो दोपहर 12 बजे तक खुला रहता है। फिर शाम को 4 से रात 8 बजे तक भगवान दर्शन देते हैं। मंदिर में अन्नकूट और रथयात्रा महोत्सव धूमधाम से मनाए
जाते हैं।