
झालावाड़. जिले के भगवानपुरा गांव में गुरुवार सुबह 6 हुए घटनाक्रम ने मां की ममता को तार-तार कर दिया। कलयुगी मां ने अपनी ममता को मारते हुए नवजात बालक को जन्म लेते ही मरने के लिए जीएसएस के पास नाले में फेंक दिया। लेकिन, कहते हैं मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है, इसलिए बच्चे के रोने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने नवजात को खानपुर अस्पताल पहुंचाया। जहां उसका उपचार चल रहा है। लोगों की सूचना पर खानपुर से मनोहर मेहरा व मेल नर्स मौके पर पहुंचे। वहां बच्चा लहुलूहान स्थित में दर्द से तड़प रहा था। वे तुरंत मासूम को अस्पताल लेकर गए। जहां चिकित्सकों ने उपचार कर झालावाड़ रैफर कर दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि अल सुबह नवजात बच्चे को कोई नवजात बच्चे को नाले में फेंक गया।
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यहां से गुजर रहे ग्रामीणों को रोने की आवाज सुनाई देने पर वे मौके पर पहुंचे तो नवजात लहुलूहान स्थिति में पड़ा था। उसकी सांसे चल रही थी। उन्होंने गांव के लोगों को सूचना दी। जिसने भी घटना के बारे में सुना वह दौड़ता हुआ घटनास्थल पर पहुंच गया। ग्रामीणों ने तुरंत बच्चे को उठाया और खानपुर अस्पताल पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार कर झालावाड़ अस्पताल रैफर कर दिया। बताया जा रहा है कि नवजात अभी खतरे से बाहर है लेकिन स्थिति नाजुक बनी हुई है। सूचना पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची और घटना की जानकारी लेकर मामले की जांच शुरू की।
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8 घंटे दर्द से तड़पता रहा मासूम
चिकित्सकों के अनुसार नवजात को दुनिया में आए अभी सिर्फ 8 घंटे ही हुए हैं। नाले में पत्थर व झाडिय़ों के कारण बच्चे के शरीर पर काफी चोट लगी है। जगह-जगह से खून बह रहा था। सिर में ज्यादा चोट लगी है। फिलहाल शिशु खतरे से बाहर है। चिकित्सकों की निगरानी में उपचार चल रहा है।
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फेंकने के बजाए पालना गृह में छोड़ दें
गौरतलब है कि सरकार ने प्रत्येक जिले के जिला अस्पताल में पालना गृह बनाया हुआ है। इसमें कोई भी अज्ञात व्यक्ति अपनी पहचान छिपाते हुए शिशु को वहां छोड़ सकता है। उससे किसी तरह की पूछताछ नहीं की जाती। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि लोग अपनी पहचान व कृत्य छिपाने के लिए नवजात शिशु को सड़क, नाले-नाली व झाडिय़ों में फेंक देते हैं। इनमें से अधिकांश काल का ग्रास बन जाते हैं। वे जिंदा रहे, इसीलिए पालना गृहों की स्थापना प्रत्येक जिले के जिला अस्पताल में की गई है।