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गुंजी किलकारी, हड़ताल का बंधन और वेतन की सलाखें भी नहीं रोक पाई मानवता को, धरना दे बैठी श्रमिक के सहयोग से प्रसूता ने दिया बालक को जन्म
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गुंजी किलकारी, हड़ताल का बंधन और वेतन की सलाखें भी नहीं रोक पाई मानवता को, धरना दे बैठी श्रमिक के सहयोग से प्रसूता ने दिया बालक को जन्म

अस्पताल के गेट पर धरना दे बैठी श्रमिक के सहयोग से प्रसूता ने दिया बालक को जन्म 20 मिनट तक महिला अस्पताल के बाहर तड़पती रही महिला, धरने पर बैठी श्रमिक ने सुरक्षित प्रसव कराया-जज्जा-बच्चा सुरक्षित
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कोटा

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Suraksha Rajora

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Sep 11, 2019

कोटा. जेकेलोन अस्पताल के मुख्यद्वार पर गेट के बाहर बकाया भुगतान की मांग को लेकर जेके लोन अस्पताल के ठेका श्रमिकों ने बुधवार को काम ठप कर दिया। इससे अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा गई। मरीजों को ट्रॉली तक नसीब नहीं हुई। इसी बीच दोपहर में एक प्रसूता को स्ट्रेचर नहीं मिलने पर अस्पताल के गेट के बाहर ही प्रसव हो गया। इस दौरान बीस मिनट तक प्रसूता तड़पती रही।

यह देख बाहर ही बैठी ठेका श्रमिक ने गर्भवती को संभाला व सुरक्षित प्रसव करवाया। महिला ने बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद में दोनों को भर्ती कराया गया।
जानकारी के मुताबिक, स्टेशन क्षेत्र निवासी संतोष को प्रसव पीड़ा होने पर दोपहर करीब एक बजे जेकेलोन अस्पताल लाया गया था।

अस्पताल के मुख्य गेट पर स्ट्रेचर नहीं होने पर महिला को बाहर ही लिटाया गया। बीस मिनट तक महिला दर्द से तड़पती रही। अंदर से कोई डॉक्टर व स्टाफ नहीं आने परकार्य बहिष्कार पर बैठी ठेका श्रमिक ने सुरक्षित प्रसव करवाया। सोशल मीडिया पर इस सारे घटनाक्रम का वीडियो दिनभर वायरल होता रहा।


– नहीं तो बच्चा की मौत हो जाती

ठेका श्रमिक कश्मीर बाई ने बताया कि गर्भवती महिला का तड़पना उससे देखा नहीं गया। वह दौड़ती हुई महिला के पास पहुंची। इसके बाद वह नाल को काटने के लिए कैंची लेने अंदर गई, लेकिन स्टाफ ने उसकी मदद नहीं की। स्टाफ बोला… डिलीवरी हो चुकी है। हम आ रहे हैं, जबकि बच्चा नाल में फंसा हुआ था। वह तुरंत लेबर रूम में रखी कैंची लेकर पहुंची और महिला का सुरक्षित प्रसव करवाया। महिला का पुत्र हुआ। कश्मीर ने बताया कि यदि बच्चा नाल में फंसा रहता तो उसकी मौत भी हो सकती थी।

– इनके बेतुके जवाब
अस्पताल के गेट के बाहर डिलीवरी नहीं हुई है। प्रसूता को एम्बुलेंस में डिलीवरी हुई है। महिला बाहर भी नहीं पड़ी रही। महिला को स्ट्रेचर पर लेबर रूम लेकर गए।

– डॉ. एच.एल. मीणा, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल