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सनसनीखेज खुलासा: राजस्थान में यहां पेट पालने के लिए मां-बाप 30 हजार में गिरवी रख देते हैं अपने बच्चे
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सनसनीखेज खुलासा: राजस्थान में यहां पेट पालने के लिए मां-बाप 30 हजार में गिरवी रख देते हैं अपने बच्चे

kota News, Baran News, Crime News: राजस्थान में कुछ जिले ऐसे हैं जहां एक समुदाय के लोग अपना पेट पालने के लिए अपने बच्चों को चंद पैसों के लिए गिरवी रख देते हैं।
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कोटा

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Zuber Khan

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Jul 01, 2019

शिवभान सिंह, हुकुमदत्त भार्गव.
शाहाबाद (बारां). नि:शुल्क राशन, शिक्षा और चिकित्सा के सरकारी दावों से इतर आदिवासी इलाकों ( tribal areas ) में जीवन कितना मुश्किल है, इसका अनुमान केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि जीवन यापन के लिए आदिवासी समुदाय ( tribal communities ) में बच्चों को गिरवी ( Pledged children ) रख दिया जाता है। बारां, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, कुशलगढ़ व मध्यप्रदेश के धार, झाबुआ, अली राजपुर इलाके में आदिवासी समाज में यह अजब रवायत आज भी है। सालभर की मजदूरी के नाम पर 30 से 40 हजार रुपए में रैबारी इन बच्चों को भेड़ और ऊंट चराने का काम देतेे हैं।

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बारां के शाहाबाद उपखंड मुख्यालय के भील समाज के गांव आनासागर, रानीपुरा, हाड़ोता, उचावत, मंगलपुरा,खूंटी, बलारपुर, आदि गांवों के 50 से ज्यादा बच्चे रेबारियों के पास गिरवी हैं। जगह-जगह भेड़ निष्क्रमण के दौरान रेवड़ के साथ यह बच्चे सहज दिख जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि चाइल्ड लाइन और मानव तस्करी यूनिट इस गोरखधंधे को जान कर भी अनजान बनी हुई हैं।

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दो भाइयों को 30 हजार में गिरवी रखा
शाहाबाद उपखंड के एक गांव के शामू और रमेश के पिता की 3-4 वर्ष पहले बीमारी से मौत हो गई। मां नाते चली गई। चाचा की हैसियत इन्हें पालने की थी नहीं, सो उसने दोनों भाइयों को रेबारियों को 30 हजार रुपए साल में गिरवी रख दिया। दोनों दो वर्ष से रेबारियों के साथ भेड़ें चराते हैं।

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पत्नी का अंतिम संस्कार करने के लिए बेटे को गिरवी रखा
शाहाबाद इलाके के एक गांव में दो वर्ष पहले दीन्या की पत्नी की मौत हुई। क्रियाकर्म और अन्य कामों पर 30 हजार रुपए खर्च हो गए। इतने रुपयों की व्यवस्था कैसे होती सो दीन्या ने अपने 14 वर्ष के बेटे को भेड़ें चराने के लिए गिरवी रख दिया। उसका बेटा अभी भी रेबारियों के साथ है।