
बारां/शाहाबाद. अपना पेट पालने के लिए बच्चों को गिरवी ( pledging childrens ) रखने की झकझरोने वाली हकीकत से सामना करने के बाद पत्रिका टीम जिले के दूरदराज के ग्रामीण आदिवासी इलाकों ( tribal areas ) में पहुंची तो नजारा चौंकाने वाला था। जिले के शाहाबाद उपखंड मुख्यालय के आनासागर, रानीपुरा, हाड़ोता, उचावत, मंगलपुरा, खूंटी, बलारपुर आदि गांवों में अधिकांश घर कच्चे मिले। जहां खाली चूल्हे और चुनिंदा बर्तन जंगल से आने वाली जलावन और भोजन का इंतजार कर रहे थे। घरों में रहने वाली महिलाओं और बच्चों के तन पर पूरे कपड़े तक नहीं थे। विकास की मुख्यधारा इन गांव-ढाणियों से कोसों दूर बह रही है।
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नहीं मिल पा रहा खाद्य सुरक्षा का पूरा लाभ
यूं तो सरकार द्वारा आदिवासी इलाकों में खाद्य सुरक्षा योजना ( food security scheme ) का पूरा लाभ पहुंचाने का दावा किया जाता है, लेकिन शाहाबाद उपखंड में ऐसा नजर नहीं आया। आदिवासी इलाकों के कच्चे घरों में गेहूं, मक्का, चावल के कनस्तर खाली पड़े थे। जो बच्चे गांव में रहते हैं, वे स्कूल ना जाकर अभिभावकों के साथ मजदूरी पर जाते हैं।
गांव में रोजगार ( Employment ) नहीं मिलने से अधिकांश लोग बड़े शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं। खाद्य सुरक्षा के नाम पर सिर्फ 2 किलो गेहूं दिया जाता है। इन लोगों को कई बार उससे भी वंचित रहना पड़ता है, क्योंकि काम की तलाश में यह लोग पलायन कर जाते हैं । इन लोगों के पास जीवन यापन करने के लिए कोई ठोस कार्य योजना नहीं है, इसलिए यह लोग पेट भरने की मजबूरी में बच्चों को भेड़ ऊंट चराने वाले पशुपालकों के पास भेज देते हैं।
बाल आयोग ने बारां कलक्टर से 7 दिन में मांगी रिपोर्ट
आदिवासियों के बच्चों को गिरवी रखे जाने का मामला राजस्थान पत्रिका में उजागर होने के बाद राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ( rajasthan state child right protection commission ) ने मामले पर प्रसंज्ञान लिया है। आयोग ने बारां कलक्टर से सात दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। बाल आयोग ने यह एक्शन अपनी पहली बैठक में ही लिया। सोमवार को बाल आयोग में नव नियुक्त अध्यक्ष संगीता बेनीवाल व तीन सदस्यों ने कार्यभार ग्रहण किया।
कार्यभार संभालते ही पांच सदस्यों के साथ पहली बैठक की। कलक्टर को भेजे पत्र के अनुसार बारां, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, कुशलगढ़ व मध्यप्रदेश इलाके में आदिवासी समाज में आज भी रवायत है कि सालभर की मजदूरी के नाम पर 30-40 हजार रुपए में रैबारी बच्चों को भेड़-ऊंट चराने का काम दे रहे हैं। आनासागर, रानीपुरा, हाड़ोता, ऊचावत, मंगलपुरा, खूंटी आदि गांवों के 50 से ज्यादा बच्चे रैबारियों के पास गिरवी हैं। यह मामला गंभीर है।