
कोटा. समाज की सुरक्षा और श्रम साध्य कार्यों के लिए खास पहचान रखने वाले आरएसी के जवानों ने रविवार अल सुबह चंबल तट पर पहुंचकर महाश्रमदान अभियान शुरू कर दिया। जवानों ने भारत माता के जयकारों के साथ चम्बल में उतर कर पानी में फेल रही जलकुंभी, कमल बेलों, डिस्पोजल, प्लास्टिक की थेलियां सहित अन्य वस्तुओं को बाहर निकाला। उन्होंने नदी के घाटों के आसपास उग रही झाडिय़ों व अन्य गंदगी की भी सफाई की। आरएसी के दर्जनों जवान श्रमदान में जुटे रहे, लगातार सफाई कर नदी के एक हिस्से को साफ कर दिया। जवानों ने बोट की मदद से चम्बल की सफाई की इससे नदी अपने स्वरूप में लौट आई। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया वैसे-वैसे जवानों का जोश भी बढ़ता गया। श्रम की बूंदों से चम्बल को निखार दिया।
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गौरतलब है कि आरएसी के जवानों ने शहर में आईएल परिसर के अलावा एक और ऑक्सीजोन विकसित करने का ख्वाब संजोया है। इसकी पहल वे एक साल पहले कर चुके हैं। अब उसे विस्तार दिया जा रहा है। पहले चरण में करीब चार हजार पौधे लगाकर उन्हें जीवित रखने में सफलता मिलने के बाद अब आरएसी परेड मैदान के चारों ओर बड़े क्षेत्र में ऑक्सीजोन विकसित करने की योजना बनाई है। द्वितीय बटालियन आरएसी कमांडेंट राहुल काटोकी खुद यहां पौधे लगाने में रुचि दिखा रहे हैं। अभी मैदान के किनारे हजारों पेड़ हरियाली का संदेश दे रहे हैं। जवान नियमित रूप से इनमें पानी देते हैं और सारसंभाल पर पूरा ध्यान दे रहे हैं।
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आरएसी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक घनश्याम शर्मा ने बताया कि यहां करीब चार हजार पौधे लगाए जाने के बाद भी काफी जगह उपलब्ध है, जहां हजारों पौधे लगाए जा सकते हैं, लेकिन यह जगह पथरीली है। ऐसे में पौधे लगाने के लिए यहां मिट्टी डालने की जरूरत है। यदि यहां मिट्टी डल जाए तो पौधे लगाकर उनकी सार संभाल का पूरा जिम्मा आरएसी के जवान उठाएंगे।
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लुभाते हैं तालाब और वाटिका
आरएसी मैदान के एक भाग में चमन वाटिक विकसित की गई है और यहां एक छोटा तलाब भी है। बरसों पहले अवैध खनन से हुए गड्ढे को श्रम के बल पर तालाब का स्वरूप दे दिया है और इसमें नाले से आने वाला पानी जमा हो जाता है। नाले के पानी के साथ आने वाले कचरे को प्राकृतिक तरीके से तालाब में जाने से रोका जाता है। इस पानी से पौधों की सिंचाई होती है। यहां विद्युत साज सज्जा भी बेहतरीन तरीके से की गई है, जो आकर्षण का केन्द्र है। वाटिका और तालाब का क्षेत्र बेहतर वास्तुकला के उदाहरण की तरह नजर आता है।