
हेमंत शर्मा@ कोटा.
शिक्षा नगरी को चमर्णण्यवती का आशीर्वाद मिला हुआ है, लेकिन जलदाय विभाग के अफसरों की ढिलाई और लापरवाही से सैकड़ों लोग पानी को तरस रहे हैं। स्थिति यह है कि बूंद-बूंद पानी ( Water crisis ) के लिए लोगों को चिलचिलाती धूप में दौड़-भाग करनी पड़ रही है। सुबह ही खाली चरे, बाल्टियां लेकर लोग पानी के जुगाड़ के लिए निकल पड़ते हंै। पानी को लेकर लड़ाई-झगड़े तक की नौबत आने लगी है। हाड़ौती में 47 डिग्री तापमान ( 47 degree temperature ) पहुंचने पर पेयजल आपूर्ति व जल समस्या की हकीकत जानने के लिए पत्रिका टीम शहर से लेकर आसपास के गांवों में पहुंची तो तस्वीर हैरान करने जैसी सामने आई।
कोटा में भी ‘रेगिस्तान’ जैसे हालात नजर आए। पानी के लिए ट्यूबवैल हो या टंकी, लोगों की कतारें लगी हुई थी। टैंकर आया तो लोग खाली बर्तन लेकर दौड़ रहे थे। शहर की पहचान चंबल से है और देशभर में 24 घंटे जलापूर्ति की पहचान रखने वाले शहर के कई क्षेत्रों के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। कहीं नल है पर पानी नहीं आता, कहीं अभी तक भी पानी नहीं पहुंचा। कई जगहों पर पाइप लाइनें और पानी भी पहुंच रहा है, लेकिन कम दबाव से जलापूर्ति परेशानी बनी हुई है।
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कई इलाकों में टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है पर ऊंट के मुंह में जीरे के समान हो रही है। इसके चलते लोगों को खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। हालात सिर्फ एक दो कॉलोनियों के नहीं है, दर्जनों कॉलोनियों के हैं। शहर से सटे क्षेत्र आंवली रोजड़ी, नयागांव, जगपुरा व आसपास की बस्तियों व प्रेम नगर, डीसीएम क्षेत्र, देवली अरब क्षेत्र, स्टेशन, कुन्हाड़ी क्षेत्र में कमोबेश पानी के लिए मारामारी नजर आई।
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नयागांव क्षेत्र में टैंकर गुजरने के बाद उपस्थित महिलाओं व लोगों ने बताया कि यहां हर दिन यही हालात रहते हैं। पानी के फेर में कई बार झगड़े हो जाते हैं। हाथापाई की नौबत आ जाती है, पर क्या करें। क्षेत्र में एक टैंकर आता है, जो कि आबादी के अनुसार कम पड़ता है। नहाने-धोने के लिए बाजार से पानी मंगवाना पड़ता है। क्षेत्र में सरकारी बोरिंग है, लेकिन इसमें पानी रीत जाता है तो समस्या हो जाती है।
टंकियां भी सूखी
नयागांव में ही एक टंकी है। इसी के पास बोरिंग खुदा हुआ था, पर बोरिंग व टंकी दोनों सूखे हुए थे। लोगों ने बताया कि इस बोरिंग की केबल को खराब हुए साल भर हो गया।
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ढाई किमी का पग फेरा
आवली रोझड़ी क्षेत्र के लोगों के हाल भी बेहाल है। क्षेत्र के लोगों को पानी के लिए बस्ती से दूर बाईपास पानी के लिए लंबी पदयात्रा करनी पड़ रही है। क्षेत्र के लोग जलदाय विभाग की लाइनों पर लगे वाल्वों के भरौसे हैं। इनकी बस्तियों में अभी तक जलदाय विभाग की लाइनें नहीं पहुंची है। लोगों ने बताया कि बस्ती को बसे वर्षों हो गए, लेकिन अब तक सरकार ने पानी के प्रबंध नहीं किए। हाइवे पर सरकारी लाइन पर लगे वाल्व से पानी भरने को विवश हैं।
पानी का जुगाड़
हैंगिग ब्रिज रोड पर बाइपास के किनारे से जलदाय विभाग की बड़ी लाइन गुजर रही है। इस लाइन में पानी के वाल्व लगे हैं। यह वाल्व पूर्व में नीचे ही थे, लेकिन गत दिनों में इन्हें सात से आठ फीट की ऊंचाई पर लगा दिया है, इसके बावजूद क्षेत्र के लोग इस वाल्व से जुड़े पाइपों के माध्यम से पानी भर रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि पीने के लिए पानी भरने व कपड़े धोने के लिए यहां आना पड़ता है।
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कंधों पर ढोते पानी
वाल्व से ज्यादा दूरी वाले बस्ती के लोग कई कंधों पर पानी का बोझ ढोते हैं। इनमें कई तो बुजुर्ग महिलाएं भी पानी भरने आती है। सर्दी, गर्मी,बरसात सभी में यही हालात रहते हैं। महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र में बस्तियों में कई रास्ते भी कच्चे हैं, इन हालातों में पानी ले जाना काफी मुश्किल है।
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कहां आते हैं टैंकर
जलदाय विभाग के सूत्रों के मुताबिक 90 टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। इनमें नया गांव में 7, आंवली में 9, रोजड़ी में 10, रथकांकरा में 2,रंगबाड़ी में 7,रातिया चौकी 1, लखावा 1 अनंतपुरा 4, प्रेम नगर तृतीय 7, सूर्य नगर, शांतिनगर, डाढ़ देवी तीनों क्षेत्रों में एक-एक, प्रेमनगर तृतीय 7 टैेकरों से जलापूर्ति की जा रही है। ये इन क्षेत्रों में अलग-अलग भागों में पहुंचाए जा रहे हैं। वहीं लोगों ने बताया कि आबादी के हिसाब से टैंकरों की संख्या कम है।