
कोटा. भीषण गर्मी में एक तरफ जहां लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं, लेकिन कोटा में सीएडी के अधिकारियों की लापरवाही से करोड़ों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है। सीएडी के कागजों में नहर भले ही बंद हो गई है। लेकिन शहर से सटे क्षेत्र में एक छोटी नहर से रोजाना ढाई करोड़ लीटर से अधिक पानी व्यर्थ बह रहा है। इसके बावजूद सीएडी के अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं। स्थित यह है कि अभियंताओं की लापरवाही के कारण छोटी नहर ओवरफ्लो हो गई और पानी घरों तक आ गया है।
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दाईं मुख्य नहर से वृहद उद्योगों के लिए नहर बंद होने के बाद भी 25 क्यूसेक पानी जारी रखा जाता है। अभी तक पानी निर्बाध रूप से चल रहा है। कन्सुआ के पास 19 करोड़ की लागत से तीन साल पहले पानी रोकने के लिए क्रॉस रेगुलेटर गेट बनाए थे, लेकिन एक भी बार इनका उपयोग नहीं किया गया है। गेट के पास से मालीपुरा की छोटी नहर में पानी छोडऩे के लिए रेगुलेटर गेट बना हुआ है। नहर बंद होने के बाद कुछ लोगों ने यह रेगुलेटर गेट खोल दिया। इससे करीब 10 क्यूसेक पानी लगातार ओवरफ्लो होकर व्यर्थ बह रहा है। स्थानीय लोगों ने सीएडी के अभियंताओं को कई बार शिकायत की, लेकिन बर्बादी को रोकने में किसी ने रूचि नहीं ली।
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24 घण्टे में 2.50 करोड़ लीटर पानी की बर्बादी
एक तरफ जहां सरकार लोगों को बूंद-बूंद पानी बचाने के लिए जागरुक कर रही है। वहीं जिस विभाग के मंत्री के पास पानी बचाने का जिम्मा है, उनके अधिकारियों की लापरवाही के कारण 24 घण्टे में 2.50 करोड़ लीटर पानी की बर्बादी हो रही है। जिसका कोई उपयोग नहीं है। कॉलोनियों में यह पानी भर रहा है। कुछ प्रभावशाली किसान इस पानी का खेती व सब्जी उगाने में उपयोग कर रहे हैं। प्रॉपर्टी डीलर अपने फार्म हाउस में अवैध रूप से पानी दे रहे हैं। इस पानी को बचाया जाए और इसका पेयजल के लिए उपयोग किया जाए तो सवा छह लाख लोगों को भरपूर पानी मिल सकता है।
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चंद कदम दूर पानी के लिए हाहाकार
दाईं मुख्य नहर से चंद कदम दूर कन्सुआ, डीसीएम, प्रेम नगर, इन्द्रगांधी नगर, प्रेम नगर अर्फोडेबल आवासीय योजना में इन दिनों पानी के लिए भारी मारामारी मची हुई है। जलदाय विभाग को टैंकरों से जलापूर्ति करने को मजबूत होना पड़ रहा है। इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है।