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कोटा में हर दिन 2.50 लाख लीटर पानी गाडिय़ों की धुलाई पर होता खर्च, एक गांव पानी पी ले इतने में धुलता है घर-आंगन
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कोटा में हर दिन 2.50 लाख लीटर पानी गाडिय़ों की धुलाई पर होता खर्च, एक गांव पानी पी ले इतने में धुलता है घर-आंगन

कोटा को चंबल का वरदान है फिर भी लोग पानी की कीमत नहीं समझ रहे। 2.50 लाख लीटर पानी तो केवल गाडिय़ों की धुलाई में खर्च कर रहे हैं। वहीं, एक गांव की प्यास बुझ जाए इतने पानी में यहां घर आंगन को धोने में व्यर्थ बहा देते हैं।
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कोटा

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Zuber Khan

•

Jun 09, 2019

कोटा. कोटा को चम्बल नदी वरदान है। यहां 24 घंटे पानी उपलब्ध रहता है। जबकि, राजस्थान के कई जिले ऐसे हैं, जहां एक बाल्टी पानी का बंदोबस्त करना जंग जीतने जैसा साबित हो रहा है। फिर भी कोटा के लोग पानी की कीमत नहीं समझ पा रहे। कोटा हर दिन 4 लाख लोगों की प्यास बुझा दे इतना पानी व्यर्थ बहा देता है। जलदाय विभाग की जर्जर पाइप लाइनों से शहर में प्रतिदिन लाखों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। पुराने कोटा से लेकर नए शहर की पाइप लाइनें जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हैं। यदि हम आज नहीं संभले तो आने वाले दिनों में हम भी प्रदेश के सूखाग्रस्त जिलों की कतार में खड़े नजर आएंगे। जहां बूंद-बूंद के लिए रोजाना संघर्ष ही जिंदगी बन गई है।

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परिवहन विभाग के अनुसार जिले में 98 हजार 417 जीपें व कारें हैं। इनमें से अनुमान के तौर पर 25 हजार कार व जीपें शहर में भी है। हालांकि हर जीप मालिक रोजाना वाहन को नहीं धोता, फिर भी एक मोटे अनुमान के तौर पर 2 हजार 500 कारों की धुलाई रोज की जा रही है। गाड़ी की धुलाई में व्यक्ति चाहे तो एक से दो बाल्टी पानी में भी काम चला सकता है, लेकिन ज्यादा पानी की कोई सीमा नहीं है।

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कम से कम 80 से 100 लीटर पानी एक कार की धुलाई में खर्च हो जाता है। इस हिसाब से 2500 गाडिय़ों की धुलाई पर करीब 2.50 लाख लीटर पानी खर्च कर देते हैं। इसके अलावा आंगन, चबूतरियों को धोने, सुबह शाम घर व छतों पर छिड़काव में लाखों लीटर पानी को व्यर्थ बहा देते हैं। एक अनुमान के मुताबिक एक गांव की प्रतिदिन जलापूर्ति के बराबर पानी घर-आंगन और छतों की धुलाई पर ही खर्च कर दिया जाता है।

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बैराज से बह रहा लाखों लीटर पानी
कोटा बैराज के गेट जंग लगने के कारण गल गए हैं। इस कारण लगातार गेटों से पानी बहता रहता है। इस पानी की कोई गणना नहीं है, लेकिन जिस तेज प्रवाह से गेटों से पानी बह रहा है, उससे लगता है प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है। जल संसाधन विभाग ने भी माना है कि 10 क्यूसेक पानी बैराज गेटों से लीकेज हो रहा है।

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जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों से पानी के लीकेज को रोकने के लगातार प्रयास जारी हैं। पानी की समस्या दूर करने के लिए टैंकर लगवाए गए हैं। जर्जर लाइनों से जल रिसाव सम्बन्धित जानकारी ली जाती है तथा लाइनों की मरम्मत करवाई जाती है। कृषि भूमि पर बनी कॉलोनियों में प्रक्रिया के तहत विभाग जलापूर्ति करता है। जो बस्तियां वन विभाग की जमीन पर बसी हैं वहां बिना स्वीकृति के लाइनें नहीं डाली जा सकती। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहां टैंकर भेजे जा रहे हैं। शहर में 120 टैंकर पानी आवश्यकता के अनुसार भेजा जा रहा है।