
वाराणसी. घाट संध्या के 538 वे दिन सुरभि सोनकर के कथक ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। डा.जया रॉय की शिष्या सुरभि ने शिव वंदना के साथ कथक की शुरूआत की। इसके बाद पारंपरिक कथक, सरगम दादरा के साथ कार्यक्रम का समापन किया। एक तरफ असि घाट पर हवाओं के साथ गंगा की लहरे अटखेलियां कर रही थी तो दूसरी तरफ नृत्य व संगीत की जुगलबंदी अपना सार्थकता को साबित कर रही थी। घाट संध्या अब स्थानीय कलाकारों के लिए बड़ा मंच बनता जा रहा है जहां से वह अपने सपने को साकार कर रहे हैं। श्रीमती विनीता सिन्हा ने कलाकार को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। संचाल सीमा केशरी ने किया।
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