
किडनी, आंख व हार्ट संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं। नसों की कमजोरी (पैरों में झनझनाहट बढऩा), जोड़ों में दर्द, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ रहा है।
क्या कहते हैं आंकड़े
इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (आइडीएफ) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 वर्षों में बच्चों में 20 प्रतिशत टाइप टू डायबिटीज बढ़ी है। वहीं, देश में आने वाले 15 सालों में डायबिटीज के मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाएगी।
व्यस्त दिनचर्या
1- बच्चे रात में देर सोते हैं और स्कूल जाने के लिए सुबह जल्दी उठते हैं। नींद पूरी नहीं होती है।
2- दोपहर बाद आने के कारण खाने व होमवर्क के बाद अक्सर खेलने का समय नहीं मिलता है।
3- माता-पिता सेफ्टी व सिक्यूरिटी की वजह से बच्चों को आउटडोर एक्टिीविटी में भेजने से बचते हैं।
4- अच्छे मार्क लाने के दबाव में बच्चों में तनाव बढ़ रहा है। इससे उनका पाचन प्रभावित होता है। यह भी मोटापा का एक कारण है।
ग्रोथ भी रुक रही
बच्चों को फास्टफूड, जंक फूड, प्रोसेस्ड चीजें खाना ज्यादा पसंद है। इसमें कैलोरी कई गुना ज्यादा होती है। कार्ब व फैट शरीर में चर्बी के रूप में जमता है। इससे मोटापा बढ़ता है। इसके लिए पै्रंक्रियाज को ज्यादा इंसुलिन रिलीज करने की जरूरत होती है। जिससे वे डायबिटीज के मरीज बन जाते हैं। इसके अलावा हार्मोन का असंतुलन बढऩे से बच्चों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन पूरी तरह से विकसित नहीं हो रहे हैं। इससे बच्चों की हाइट बढऩे में भी दिक्कत आती है।
ऐसे समझें मोटापा
बीएमआइ चार्ट से बच्चों की फिटनेस कैलकुलेट करें। यदि बीएमआई चार्ट ८५ प्रतिशत से ज्यादा परसेंटाइल है तो बच्चा ओबीज कैटेगरी में है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बच्चों में मोटापे के लिए माता-पिता जिम्मेदार होते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि उसे अच्छी सेहत के लिए और खिलाएं। इससे वह जरूरत से ज्यादा खिलाते हैं। जबकि बच्चों का खाना फीडिंग ऑन डिमांड होना चाहिए। जब मांगें तभी खिलाना चाहिए। आहार में फल व सलाद जरूर खिलाएं। नियमित खेलने के लिए पार्क आदि में भेजें।
- डॉ. संजय सारण, असिस्टेंट प्रोफेसर, हॉर्मोन विभाग, एसएमएस मेडिकल, जयपुर
Updated on:
28 Oct 2019 02:22 pm
Published on:
28 Oct 2019 02:22 pm
