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पाकिस्तान को संकट में डाल आजादी की ओर बढ़ा बलूचिस्तान, विरोध अब अपने चरम पर

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में विद्रोह की आग अब भड़क चुकी है। बीते दिनों यहां एकबार फिर BLA के लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना पर कहर बरपाया था। BLA ने पाकिस्तान से अलग होने और बलूचिस्तान की आजादी की घोषणा की है।
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Balochistan Liberation army

बलूचिस्तान मुक्ति सेना। ( फोटो : X/ @UpendrraRai)

पाकिस्तान के 44 प्रतिशत हिस्से वाले प्रांत बलूचिस्तान में बलूच आर्मी ने हाल में कई बड़े हमले पाक सुरक्षाबलों पर किए। पाक सरकार और सेना इस समय कई मोर्चों पर फंसी है। अफगानिस्तान सीमा पर संघर्ष। खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के हमले। पीओके की जनता भी विद्रोह कर रही है। इस बीच बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान से अलग होने और बलूचिस्तान की आजादी की घोषणा की है।

बीएलए ने कहा कि अब इसे रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के नाम से जाना जाएगा। पाक सरकार इस प्रांत की खनिज संपदा का दोहन पाक लगातार करता आया है। जो स्थानीय समुदायों की नाराजगी का अहम कारण है। ऐतिहासिक तौर पर भी यहां के समुदाय कभी पाक से नहीं जुड़ सके और विद्रोह का सिलसिला चलता रहा। हालांकि बीएलए की घोषणा के बाद भी बलूचिस्तान को देश का दर्जा मिलना आसान नहीं है, लेकिन पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के लिए यह बलूचिस्तान का मुद्दा बड़ी चुनौती बन चुका है।

1948 में की थी अलग देश की मांग

पाकिस्तान की स्थापना के समय से ही बलूचिस्तान का विरोध जारी है। तब यहां कलात शासन था। पाक के मुताबिक कलात रियासत ने पाकिस्तान में शामिल होने के लिए स्वेच्छा से विलय पत्र पर साइन दस्तखत किए थे। जबकि बलूच समूह के मुताबिक यह विलय सैन्य दबाव में हुआ था। 1947 से पहले यहां के कुछ हिस्से पर ब्रिटिश और कुछ हिस्सों पर कई रियासतों का शासन था। 1948 में यहां के बलूच नेताओं ने भारत में विलय या एक औपचारिक रक्षा समझौते की संभावना तलाशने के लिए दिल्ली दूत भी भेजे थे। हालांकि उस समय प्रधानमंत्री नेहरू ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

नए देश का दर्जा पाने के लिए ये शर्तें-

  • 1933 के मोंटेवीडियो कंन्वेंशन के अनुसार संप्रभु देश बनने के लिए चार विशेषताएं जरूरी
  • इलाके में स्थायी आबादी जिनकी अपनी संस्कृति, मूल भाषा और भाषाई पहचान हो।
  • पब्लिक ऑर्डर बनाने के लिए एक सरकार काम कर रही हो।
  • दूसरे देशों से संबंध बनाने की क्षमता और उनसे मान्यता पाना।-अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शामिल होना, पासपोर्ट मान्यता दिलाना, ग्लोबल बैकिंग और फाइनेंशियल सिस्टम का इस्तेमाल करना।

खनिजों से भरा, दो देशों से जुड़ा

बलूचिस्तान प्रांत पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। इसकी सीमाएं ईरान और अफगानिस्तान से जुड़ती हैं, दक्षिण में अरब सागर है। यह इलाका खनिजों से भरपूर माना जाता है। सोना, तांबा, कोयला, लेड,जिंक, क्रोमाइट, मोलिब्डेनम जैसे खनिजों के भंडार यहां होने की पुष्टि हुई है। यहां का रेको डिक इलाका दुनिया के सबसे बड़े तांबा-सोने के भंडारों में से एक है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं। बलूच, ब्रहुई और पख्तून। उत्तरी बलूचिस्तान में पख्तून समुदाय का प्रभुत्व है। पाकिस्तान का रणनीतिक रूप से अहम ग्वादर पोर्ट भी इसी प्रांत में आता है। चीन का यहां बड़ा निवेश किया है।

बलूचिस्तान में पाक के जुल्मों का लंबा इतिहास

  • बलूचों के अनुसार 2000 से अब तक कुल 23000 से ज्यादा लोग लापता हो चुके हैं। इनमें युवा, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।-1948,1958-59, 1962-63, 1973-77 और साल 2000 से अब तक यहां लगातार पाक सेना ने अभियान चला कर दमन किया।
  • 2005 में पाक के रक्षामंत्री रहे नवाब अकबर खान बुगती ने पाक सरकार के खिलाफ हथियार उठाए और पाक सरकार के समक्ष 15 मांगे रखीं। अगले ही साल बुगती की हत्या हो गई। आरोप लगा परवेज मुशर्रफ पर।
  • एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं ने यहां लोगों के गायब होने, हिंसा और गिरफ्तारियों को लेकर कई रिपोर्ट्स जारी की हैं।

अब बलूच लिबरेशन आर्मी की अगुवाई मेे आजादी का आंदोलन

बलूचिस्तान में पाक सरकार व सेना के खिलाफ कई संगठन लड़ाई लड़ रहे हैं। इनमें बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) प्रमुख है। इसके अलावा बीएलएफ, बीएनए जैसे समूह भी सक्रिय हैं। 2020 में बीएलए के 600 लड़ाके बताए जाते थे,लेकिन अब इनकी संख्या हजारों में है। ये गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाते हैं। बीएलए का दावा है कि 2025 में उसने 521 हमले किए इनमें 1060 पाक सैनिक मारे गए। हालांकि पाक के अलावा अमरीका, यूरोपीय संघ ने भी इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया है।